Business Desk – कर्मचारी भविष्य निधि यानी EPF को लेकर सरकार ने एक अहम आपातकालीन प्रावधान जोड़ा है। इसके तहत अगर देश में महामारी या राष्ट्रीय आपदा जैसी स्थिति आती है तो केंद्र सरकार कर्मचारियों और नियोक्ताओं के PF योगदान को एक बार में अधिकतम तीन महीने के लिए घटा या स्थगित कर सकती है। यह राहत पूरे देश या किसी खास राज्य या क्षेत्र में लागू की जा सकती है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि अब हर महीने कर्मचारियों की PF कटौती कम हो जाएगी। सामान्य परिस्थितियों में PF योगदान का मौजूदा नियम ही लागू रहेगा। सरकार को यह विशेष अधिकार केवल महामारी, एंडेमिक या राष्ट्रीय आपदा जैसी असाधारण स्थिति में इस्तेमाल करने की अनुमति होगी और इसके लिए अलग से सरकारी आदेश जारी करना होगा।
सामान्य दिनों में 12% PF योगदान जारी रहेगा
सामान्य तौर पर कर्मचारी के मूल वेतन का 12% PF के तौर पर कटता है और नियोक्ता भी निर्धारित योगदान करता है। कुछ अधिसूचित संस्थानों में योगदान की दर 10% हो सकती है। कर्मचारी या कंपनी अपनी मर्जी से इस अनिवार्य योगदान को कम नहीं कर सकते। यानी नया प्रावधान कर्मचारियों को खुद PF कटौती घटाने का विकल्प नहीं देता।
सरकार ने यह व्यवस्था संकट के समय कर्मचारियों और कंपनियों को तत्काल आर्थिक राहत देने के लिए जोड़ी है। कोविड-19 महामारी के दौरान मई, जून और जुलाई 2020 के लिए PF योगदान की दर 12% से घटाकर 10% की गई थी। इसका मकसद उस समय कर्मचारियों के हाथ में ज्यादा नकदी पहुंचाना और कंपनियों पर वित्तीय दबाव कम करना था। अब इसी तरह की आपात स्थिति के लिए नियमों में स्थायी कानूनी व्यवस्था बनाई गई है।
PF कम कटने पर इन-हैंड सैलरी बढ़ेगी
अगर सरकार किसी आपदा के दौरान PF योगदान की दर कम करती है तो कर्मचारी की टेक-होम सैलरी बढ़ सकती है। उदाहरण के लिए, अगर किसी कर्मचारी के वेतन से हर महीने 6,000 रुपए PF में जमा होते हैं और सरकार इसे घटाकर 5,000 रुपए कर देती है, तो हर महीने 1,000 रुपए अतिरिक्त हाथ में आएंगे। तीन महीने में कर्मचारी को कुल 3,000 रुपए की अतिरिक्त नकदी मिल सकती है।
लेकिन इसका दूसरा असर PF खाते पर पड़ेगा। इस उदाहरण में सामान्य स्थिति में तीन महीने में PF खाते में 18,000 रुपए जमा होते, जबकि कम योगदान की स्थिति में 15,000 रुपए ही जमा होंगे। यानी खाते में 3,000 रुपए कम जमा होंगे।
कम PF जमा होने से रिटायरमेंट फंड पर असर
PF में कम योगदान का फायदा अभी ज्यादा इन-हैंड सैलरी के रूप में मिल सकता है, लेकिन लंबे समय में इसका असर रिटायरमेंट फंड पर पड़ सकता है। PF खाते में जितनी कम राशि जमा होगी, उस रकम पर मिलने वाला ब्याज भी उतना ही कम होगा। चक्रवृद्धि ब्याज के कारण लंबे समय में इसका असर रिटायरमेंट कॉर्पस पर पड़ सकता है।
वहीं अगर सरकार योगदान को घटाने के बजाय कुछ समय के लिए स्थगित करती है तो स्थिति अलग होगी। योगदान घटाने का मतलब है कि तय अवधि में कम राशि जमा होगी और कम की गई रकम को बाद में जमा करना जरूरी नहीं होगा। जबकि योगदान स्थगित करने का मतलब भुगतान को कुछ समय के लिए टालना है, जिसे बाद में तय नियमों के अनुसार जमा किया जा सकता है।
VPF वालों पर क्या असर पड़ेगा?
वॉलेंटरी प्रोविडेंट फंड यानी VPF का नियम अलग है। इसमें कर्मचारी अपनी रिटायरमेंट बचत बढ़ाने के लिए अनिवार्य PF योगदान से ज्यादा रकम जमा कर सकता है। कर्मचारी बेसिक सैलरी के 100% तक VPF योगदान कर सकता है, लेकिन इस अतिरिक्त रकम में नियोक्ता को बराबर योगदान देना जरूरी नहीं होता।
नए इमरजेंसी प्रावधान का मुख्य असर वैधानिक यानी अनिवार्य PF योगदान पर होगा। VPF के अतिरिक्त योगदान पर क्या व्यवस्था होगी, यह संबंधित सरकारी आदेश और उस समय लागू नियमों पर निर्भर करेगा।
इस नए प्रावधान का सबसे अहम मतलब यह है कि सामान्य दिनों में PF की कटौती पहले की तरह जारी रहेगी। सरकार को सिर्फ महामारी या राष्ट्रीय आपदा जैसी असाधारण स्थिति में अधिकतम तीन महीने के लिए योगदान घटाने या स्थगित करने की शक्ति मिलेगी। इसलिए अभी कर्मचारियों की सामान्य PF कटौती में कोई बदलाव नहीं माना जाना चाहिए।



