सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बरी करते हुए कहा कि व्हाट्सऐप मैसेज सजा के लिए काफी नहीं है. न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की बेंच ने यह फैसला सुनाया. बेंच ने फैसले में स्पष्ट किया कि आरोपी को अन्य बातों के अलावा अभियोजन पक्ष के दो गवाहों के बीच हुई एक व्हाट्सएप चैट के आधार पर दोषी ठहराया गया था.

कोर्ट ने कहा कि जिन व्हाट्सएप मैसेजेस के आधार पर उसे दोषी ठहराया गया था, वो उसकी सजा को कायम रखने के लिए काफी नहीं हैं.

व्हाट्सऐप मैसेज के आधार पर हत्या मामले में दोषी करार दिए गए एक शख्स को सुप्रीम कोर्ट ने बरी कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि जिन व्हाट्सएप मैसेज के जरिए उसे अपराध से जोड़ने का दावा किया गया था, वे उसकी सजा को बरकरार रखने के लिए पर्याप्त नहीं हैं.

इस चैट में कहा गया था कि आरोपी अपने मृत दोस्त की हत्या के लिए जिम्मेदार है. चैट में अपराध में आरोपी की कथित भूमिका का जिक्र था और बताया गया था कि मौत से पहले आरोपी और मृतक के बीच लड़ाई हुई थी. हालांकि, न तो संदेश भेजने वाले और न ही प्राप्त करने वाले ने आरोपी की उस कथित भूमिका को अपनी आंखों से देखा था, जो इस चैट को सबूत के तौर पर प्रासंगिक बनाने के लिए जरूरी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गवाह-5 और गवाह-6 के बीच संदेशों का आदान-प्रदान यह साबित नहीं करता कि उस दुर्भाग्यपूर्ण रात मृतक आरोपी के घर में मौजूद था और आरोपी ने मृतक पर हमला किया था. अदालत ने साक्ष्य अधिनियम की धारा 6 के तहत संदेश भेजने को सुनी-सुनाई बातों के साक्ष्य के अपवाद के रूप में मानने से इनकार कर दिया.

अपीलकर्ता पर IPC की धारा 302 और 201 के तहत आरोप लगाए गए और सेशन कोर्ट ने उसे दोषी ठहराया. हाईकोर्ट द्वारा उसकी सजा बरकरार रखने के फैसले से असंतुष्ट होकर, आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की.

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m