वीरेंद्र कुमार, नालंदा। भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपने हालिया बिहार दौरे के दौरान राजगीर में एक कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने चुनाव प्रक्रिया के सबसे अहम हिस्से यानी बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) की भूमिका की खुलकर सराहना की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बीएलओ ही हमारे लोकतंत्र की सबसे मजबूत और बुनियादी आधारशिला हैं। विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के दौरान बिहार के बीएलओ ने जिस लगन, निष्ठा और उत्कृष्ट कार्यशैली का परिचय दिया है, उसने न केवल राज्य स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बेहतरीन मिसाल कायम की है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव कर्मियों के इस समर्पण को लोकतंत्र की रीढ़ बताया।
हर स्तर पर होती है कड़ी निगरानी और पारदर्शी ऑडिट
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने भारतीय चुनावी प्रणाली की निष्पक्षता, मजबूती और पारदर्शिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि देश की संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया लगातार ‘कॉनकरेंट ऑडिट’ यानी समवर्ती समीक्षा के दायरे में रहकर संचालित होती है। इसमें किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं बचती। मतदाता सूची के निर्माण से लेकर अंतिम चुनाव परिणाम घोषित होने तक, पूरी प्रक्रिया पर राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की पैनी नजर रहती है।
प्रक्रिया के हर चरण को स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (BLA) लगातार मतदाता सूचियों की गहन समीक्षा करते हैं। इसके बाद, मतदान के दिन प्रत्येक उम्मीदवार के पोलिंग एजेंट मतदान केंद्रों पर पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मुस्तैद रहते हैं। ठीक इसी प्रकार, मतगणना के महत्वपूर्ण चरण के दौरान काउंटिंग एजेंट वोटों की गिनती की हर गतिविधि पर बारीक नजर रखते हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि इस त्रि-स्तरीय बहुपक्षीय निगरानी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया में नागरिकों का अटूट विश्वास और शत-प्रतिशत पारदर्शिता बनाए रखना है।
नालंदा की प्राचीन ज्ञान परंपरा से हुए अभिभूत
अपने इस ऐतिहासिक बिहार दौरे के दौरान, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्राचीन और ऐतिहासिक नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेषों का भी भ्रमण किया। नालंदा के गौरवशाली प्राचीन इतिहास, वास्तुकला और विश्व प्रसिद्ध ज्ञान की परंपरा को देखकर वे बेहद प्रभावित नजर आए।
अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक भूमि पर कदम रखने के बाद उन्हें गहराई से यह अहसास हुआ कि हजारों वर्ष पूर्व भी हमारी भारतीय संस्कृति कितनी अधिक उन्नत, वैज्ञानिक और प्रगतिशील थी। ज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में प्राचीन भारत पूरी दुनिया का सिरमौर और अत्यंत समृद्ध रहा है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने उपस्थित सभी प्रशासनिक अधिकारियों, चुनाव कर्मियों और नागरिकों का हृदय से धन्यवाद किया। अंत में उन्होंने जय भारत के ओजस्वी उद्घोष के साथ अपने इस प्रेरणादायक संबोधन को विराम दिया, जिसने सभी में राष्ट्रभक्ति और कर्तव्यबोध का संचार किया।


