कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में संरक्षण व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। अभयारण्य में लंबे समय से वन अधिकारियों के अहम पद खाली पड़े हैं। अब सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी यानी सीईसी ने अपनी पांचवीं रिपोर्ट में इन पदों पर तत्काल नियुक्तियां करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकार को स्पष्ट कहा गया है कि वन्यजीव संरक्षण से जुड़े संवेदनशील पद लंबे समय तक खाली नहीं रहने चाहिए। साथ ही अवैध खनन पर कार्रवाई और वनकर्मियों की सुरक्षा मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट नंबर 37 दाखिल
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध खनन और जलीय जीवों के संरक्षण से जुड़े मामलों पर सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट नंबर 37 दाखिल की है। रिपोर्ट में चंबल अभयारण्य में लंबे समय से खाली पड़े उप वन संरक्षक और सहायक वन संरक्षक के पदों पर तत्काल नियुक्तियां करने के लिए प्रदेश सरकार से कहा गया है। सीईसी ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकार को स्पष्ट किया है कि भविष्य में संवेदनशील पद लंबे समय तक रिक्त नहीं रहने चाहिए। सीईसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल किसी योजना को मंजूरी मिलना ,उपकरण खरीदने का आदेश जारी होना या निर्माण कार्य स्वीकृत हो जाना, उसके क्रियान्वयन का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
साझा डैशबोर्ड तैयार करने की योजना अब तक लागू नहीं
वास्तविक अनुपालन तभी माना जाएगा, जब उपकरण स्थापित होने के बाद काम कर रहे हों, प्रशिक्षित कर्मचारी तैनात हों और जमीन पर उनके परिणाम दिखाई दें। रिपोर्ट में तीनों राज्यों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान और संयुक्त कार्रवाई की व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है। साझा डैशबोर्ड तैयार करने की योजना अब तक लागू नहीं हो सकी है। राजस्थान के धौलपुर में अवैध खनन और वन अपराधों में जब्त वाहनों की कुर्की की कार्रवाई लंबित रहने के दौरान उन्हें छोड़ने का मामला भी रिपोर्ट में उठाया गया है। सीईसी ने राजस्थान सरकार से ऐसे मामलों का वाहनवार विवरण उपलब्ध कराने को कहा है।
वन सुरक्षा बल गठित करने के प्रस्ताव पर विचार
सीईसी ने अवैध खनन रोकने में लगे वनकर्मियों की सुरक्षा को भी गंभीर मुद्दा माना है। रिपोर्ट में वन सुरक्षा बल गठित करने के प्रस्ताव पर विचार करने की सिफारिश की गई है। साथ ही वनकर्मियों को कानूनी सहायता, बीमा, चिकित्सा सुविधा और सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने की जरूरत बताई गई है।रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चंबल नदी का संरक्षण केवल अवैध खनन रोकने तक सीमित नहीं रह सकता। नदी का स्वास्थ्य उसके मौसमी प्रवाह, कम पानी के मौसम में उपलब्ध जल,प्राकृतिक स्वरूप और जलीय जीवों के आवास पर निर्भर करता है। ऐसे में चंबल अभयारण्य के संरक्षण के लिए तीनों राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और जमीन पर प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।
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