छपरा, पंकज श्रीवास्तव। बिहार के सारण जिले में शिक्षा विभाग के भीतर चल रहे वित्तीय घपले का बड़ा मामला सामने आया है। शिक्षकों के वेतन और एरियर भुगतान में हुई गंभीर धांधली के खिलाफ कार्रवाई करते हुए निगरानी विभाग की विशेष टीम ने बुधवार को नगरा प्रखंड संसाधन केंद्र (बीआरसी) के अकाउंटेंट राजीव कुमार को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी छपरा स्थित जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कार्यालय के स्थापना संभाग परिसर से की गई, जिसके बाद से पूरे प्रशासनिक महकमे में अफरा-तफरी का माहौल है।

​डीईओ कार्यालय बुलाकर की गई कार्रवाई

​सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नगरा प्रखंड क्षेत्र के कई शिक्षकों ने वेतन और बकाया एरियर भुगतान में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए निगरानी विभाग ने मामले की गुप्त जांच शुरू की। शुरुआती पड़ताल में नगरा बीआरसी के स्तर से बड़े पैमाने पर वित्तीय धांधली के साक्ष्य मिले। इसके बाद रणनीतिक योजना के तहत अकाउंटेंट राजीव कुमार को फाइल एवं अभिलेखों के सत्यापन के बहाने डीईओ कार्यालय बुलाया गया, जहां पहले से मुस्तैद निगरानी की टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

​मेकर, चेकर और एप्रूवर की भूमिका पर कसता शिकंजा

​निगरानी विभाग अब इस वित्तीय अनियमितता के पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुट गया है। जांच टीम भुगतान प्रक्रिया के हर डिजिटल व कागजी चरण की गहराई से पड़ताल कर रही है। इसमें ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम के तहत शामिल ‘मेकर’, ‘चेकर’ और ‘एप्रूवर’ की भूमिका को मुख्य रूप से जांच के दायरे में रखा गया है। अधिकारियों का मानना है कि इतनी बड़ी रकम का गलत भुगतान बिना किसी संगठित मिलीभगत के संभव नहीं है। आने वाले दिनों में कई अन्य कर्मियों और अधिकारियों पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है।

​2007 से पदस्थापित थे आरोपी अकाउंटेंट

​मामले की पुष्टि करते हुए जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि गलत वेतन आवंटन और वित्तीय अनियमितताओं के ठोस सबूत मिलने के बाद ही यह विभागीय कार्रवाई की गई है। आरोपी राजीव कुमार वर्ष 2007 से ही नगरा बीआरसी में अकाउंटेंट के पद पर तैनात थे। लंबे कार्यकाल के कारण वे भुगतान प्रणाली की हर बारीकी से वाकिफ थे। फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही घपले की कुल राशि व अन्य शामिल चेहरों का खुलासा हो सकेगा।