सुनील उपाध्याय, छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले का प्रसिद्ध और ऐतिहासिक जल विहार मेला इस बार अपनी व्यवस्थाओं को लेकर विवादों के साये में आ गया है। अपनी ही पार्टी (बीजेपी) की नगर पालिका अध्यक्ष के कार्यकाल के बावजूद, एक बीजेपी पार्षद प्रतिनिधि ने नगर पालिका के अधिकारियों पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं, जिससे स्थानीय राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।

पार्षद प्रतिनिधि के गंभीर आरोप

जल विहार मेले में दुकानों के आवंटन (Shop Allotment) को लेकर बीजेपी पार्षद प्रतिनिधि ने आरोप लगाया है कि नगर पालिका के अधिकारियों द्वारा 20 से 25 हजार रुपये लेकर मनमाफिक तरीके से दुकानदारों को दुकानें आवंटित की जा रही हैं। उनका दावा है कि नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को फायदा पहुँचाया जा रहा है, जिससे जरूरतमंद और स्थानीय लोग परेशान हो रहे हैं।

नगर पालिका इंजीनियर और सीएमओ का पलटवार

इन गंभीर आरोपों के सामने आने के बाद नगर पालिका के अधिकारी भी पूरी तरह से बचाव की मुद्रा में आ गए हैं और उन्होंने आरोपों का कड़ा खंडन किया है। नगर पालिका के इंजीनियर ने मोर्चा संभालते हुए कहा कि पार्षद प्रतिनिधि सुरेंद्र साहू द्वारा अपनी पसंद की जगह दुकान देने के लिए अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा था। जब मेले में पर्याप्त जगह ही नहीं बची है, तो दुकान कहाँ से दी जा सकती है? इसी खीझ के चलते वे कर्मचारियों पर निराधार आरोप लगा रहे हैं। यदि उनके पास इन आरोपों के समर्थन में कोई सत्यता या सबूत है, तो वे लिखित शिकायत करें; प्रशासन इसकी निष्पक्ष जांच करवाएगा और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पूरे मामले पर नगर पालिका सीएमओ का कहना है कि इस ऐतिहासिक मेले से नगर पालिका को लगभग 50 लाख रुपये की आय होने का अनुमान है। मेले का आयोजन पूरी तरह से सुव्यवस्थित तरीके से कराया जा रहा है और लगाए जा रहे सभी आरोप बेबुनियाद और निराधार हैं।

क्या है जल विहार मेले का महत्व?

आपको बता दें कि छतरपुर का ऐतिहासिक जल विहार मेला पिछले कई वर्षों से लगातार संचालित होता आ रहा है, जो अमूमन दीपावली के आसपास लगाया जाता है। इस मेले को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुँचते हैं। यहाँ के विभिन्न प्रकार के झूले, सांस्कृतिक कार्यक्रम और रौनक मुख्य आकर्षण का केंद्र होते हैं। 

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