रायपुर। छत्तीसगढ़ के चर्चित 3200 करोड़ रुपये से अधिक के शराब घोटाले में ACB/EOW ने बड़ा एक्शन लिया है। ब्यूरो ने आज 20 व्यक्तियों और 22 फर्मों-कंपनियों के खिलाफ विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) रायपुर में 27,000 पन्नों का दसवां चालान पेश किया। इस चालान में रामगोपाल अग्रवाल, यश टुटेजा और अख्तर ढेबर सहित 20 लोगों और छत्तीसगढ़ डिस्टिलरी लिमिटेड, वेलकम डिस्टिलरी, भाटिया वाइन्स मर्चेन्ट्स, प्रिज्म होलोग्राफी सहित 22 कंपनियाें को आरोपी बनाए गए हैं। चालान में शराब के अवैध उत्पादन, परिवहन और विक्रय, कमीशन वसूली, हवाला तथा अपराध से प्राप्त रकम को फर्मों, कंपनियों और संपत्तियों में लगाने से संबंधित साक्ष्य शामिल किए गए हैं।

प्रकरण की विवेचना में पाया गया कि अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी तथा सिंडिकेट से जुड़े अन्य व्यक्तियों द्वारा राज्य की आबकारी व्यवस्था का दुरुपयोग कर देशी, विदेशी शराब की आपूर्ति पर अवैध कमीशन वसूला गया। डिस्टिलरी संचालकों से बिना आबकारी शुल्क चुकाए अतिरिक्त देशी शराब तैयार कराई गई, जिसे पार्ट-बी शराब कहा जाता था। इस शराब पर डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर फर्जी अथवा डुप्लीकेट परिवहन परमिट से शासकीय शराब दुकानों तक पहुंचाया गया। इसकी बिक्री शासकीय रिकॉर्ड में दर्ज नहीं की जाती थी और बिक्री की नकद रकम अलग एकत्र कर सिंडिकेट को दी जाती थी।

व्यक्तिगत आरोपियों में रामगोपाल अग्रवाल, नवीन केडिया, राजेन्द्र जायसवाल उर्फ चुन्नू जायसवाल, भूपेन्द्र पाल सिंह भाटिया उर्फ गोल्डी भाटिया, प्रिन्स भाटिया, विधु गुप्ता, अशोक सिंह, नवनीत गुप्ता, सत्येन्द्र प्रकाश गर्ग, विकास कुमार, राजीव द्विवेदी, एन. उदय राव, आशीष सौरभ केडिया, सुमित कुमार मालू उर्फ टिंकू मालू, रवि बजाज, आशीष श्रीवास्तव, यश टुटेजा, अख्तर ढेबर, बीआर लोहिया तथा कुमार भाई ठक्कर उर्फ खंजन ठक्कर शामिल हैं। आरोपित संस्थाओं में छत्तीसगढ़ डिस्टिलरी लिमिटेड, वेलकम डिस्टिलरी प्रा.लि., भाटिया वाइन्स मर्चेन्ट्स प्रा.लि., प्रिज्म होलोग्राफी एण्ड सिक्योरिटी फिल्म्स प्रा.लि., दिशिता वेंचर्स प्रा.लि., ओम साई ब्रेवरेजेस प्रा.लि., नेक्सजेन पावर इंजीटेक प्रा.लि. तथा अन्य संबंधित फर्में व कंपनियां शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ डिस्टिलरी लिमिटेड के प्रमुख संचालक नवीन केडिया, वेलकम डिस्टिलरी के संचालक राजेन्द्र जायसवाल उर्फ चुन्नू जायसवाल तथा भाटिया वाइन्स मर्चेन्ट्स के संचालक भूपेन्द्र पाल सिंह भाटिया उर्फ गोल्डी भाटिया और प्रिन्स भाटिया की सिंडिकेट के साथ मिलकर काम करने की भूमिका पाई गई है। वैध शराब की आपूर्ति पर पार्ट-ए कमीशन और सप्लाई एरिया/जोन व मार्केट शेयर के नाम पर पार्ट-सी कमीशन दिया जाता था। इसके साथ ही डिस्टिलरियों में नियमित उत्पादन और आबकारी अभिलेखों से बाहर पार्ट-बी शराब तैयार कर शासकीय दुकानों तक पहुंचाई जाती थी। कमीशन और अवैध उत्पादन के खर्च का समायोजन नकद भुगतान, ओव्हर बिलिंग और फर्जी बिलिंग से किया जाता था।

विधु गुप्ता और उसकी कंपनी प्रिज्म होलोग्राफी एण्ड सिक्योरिटी फिल्म्स प्रा.लि. द्वारा सिंडिकेट के सहयोग से होलोग्राम आपूर्ति का टेंडर प्राप्त किया गया। कंपनी की फैक्ट्री में वैध होलोग्राम के साथ डुप्लीकेट होलोग्राम भी तैयार कराए गए, जिनका उपयोग पार्ट-बी शराब की बोतलों पर किया गया। होलोग्राम की आपूर्ति पर सिंडिकेट को कमीशन दिया जाता था।

बोतल आपूर्तिकर्ता नवनीत गुप्ता और सत्येन्द्र प्रकाश गर्ग द्वारा पार्ट-बी शराब के उत्पादन के लिए डिस्टिलरियों को अतिरिक्त खाली बोतलें उपलब्ध कराई गईं। इन अतिरिक्त बोतलों की लागत का समायोजन नियमित आपूर्ति के बिलों में दर और रकम बढ़ाकर किया गया। परिवहनकर्ता अशोक सिंह द्वारा वैध शराब के साथ पार्ट-बी शराब अपने और संबंधित परिवहनकर्ताओं के वाहनों से शासकीय दुकानों तक पहुंचाई गई। अवैध परिवहन के खर्च को अधिक बिलिंग के माध्यम से समायोजित किया गया।
विदेशी शराब की आपूर्ति के लिए FL-10A लाइसेंस प्राप्त दिशिता वेंचर्स, ओम साई ब्रेवरेजेस और नेक्सजेन पावर इंजीटेक के माध्यम से निर्माता कंपनियों तथा सीएसएमसीएल के बीच निजी कंपनियों को लाकर लाभ और कमीशन की व्यवस्था बनाई गई। दिशिता वेंचर्स के मुख्य संचालक आशीष सौरभ केडिया द्वारा कंपनी के लाभ का निर्धारित हिस्सा तथा विदेशी शराब की आपूर्ति से प्राप्त कमीशन सिंडिकेट तक पहुंचाया गया। संबंधित कंपनियों ने ब्रांड प्रमोशन और सेल्स स्कीम के नाम पर प्राप्त रकम का तय हिस्सा भी सिंडिकेट को दिया।

संजय दीवान की फर्म महाकाल इंटरप्राइजेज का उपयोग विदेशी शराब कंपनियों से सिंडिकेट के लिए कमीशन एकत्र करने में किया गया। फर्म के खाते में प्राप्त रकम दूसरे खातों में भेजकर नकद निकाली जाती थी और सिंडिकेट तक पहुंचाई जाती थी। श्री साई प्रसन्ना डेवलपर्स प्रा.लि. के खाते में ओम साई ब्रेवरेजेस से कमीशन की रकम प्राप्त कर कंपनी के नाम पर भूमि खरीदी गई।

विवेचना में रामगोपाल अग्रवाल द्वारा पार्टी फंड के नाम पर 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की नकद रकम प्राप्त करने, उसका हिसाब और प्रबंधन करने तथा आगे भेजने के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। यश टुटेजा द्वारा अवैध रकम प्राप्त कर उसे पारिवारिक खातों और संपत्तियों से जोड़ने तथा भूमि के क्रय-विक्रय से उसके स्रोत को वैध दिखाने की भूमिका पाई गई है। अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर के बीच संपर्क तथा रकम से संबंधित व्यवस्थाओं में यश टुटेजा के सहयोग के साक्ष्य भी मिले हैं। अख्तर ढेबर द्वारा संबंधित फर्मों और कंपनियों के खातों में अवैध रकम अनसिक्योर्ड लोन के रूप में प्राप्त कर उसे भूमि और अन्य अचल संपत्तियों में लगाने के साक्ष्य मिले हैं।

चालान में चिह्नित 15 जिलों में पार्ट-बी की 60,50,950 पेटियों की अवैध बिक्री का सकल मूल्य लगभग 2,174.67 करोड़ रुपये आकलित किया गया है। देशी शराब की वैध आपूर्ति पर पार्ट-ए कमीशन लगभग 319.27 करोड़ रुपये तथा मार्केट शेयर और सप्लाई एरिया के नाम पर पार्ट-सी कमीशन 52 करोड़ रुपये पाया गया है। विदेशी शराब से संबंधित विभिन्न मदों का कमीशन लगभग 281.89 करोड़ रुपये और FL-10A लाइसेंसी कंपनियों का सकल लाभ लगभग 248.51 करोड़ रुपये है। देशी और विदेशी शराब से संबंधित उक्त मदों का योग लगभग 3,076.34 करोड़ रुपये है। इसमें अवैध शराब का सकल बिक्री मूल्य, कमीशन और लाइसेंसी कंपनियों का सकल लाभ शामिल है।

शासकीय शराब दुकानों में सुपरवाइजर, सेल्समैन और अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति करने वाली मैनपावर एजेंसियों के संचालकों एवं प्रबंधकों ने पार्ट-बी शराब की अवैध बिक्री में सिंडिकेट की मदद की। उक्त कार्यों में विकास कुमार, राजीव द्विवेदी, एन. उदय राव तथा बी0आर0 लोहिया की भूमिका पाई गई है। एजेंसियों के अधीन कर्मचारियों से दुकानों में आने वाली पार्ट-बी शराब बिना स्कैन किए उतरवाई जाती थी। इस शराब को नियमित स्टॉक से अलग रखकर पहले बेचा जाता था और दैनिक बिक्री रजिस्टर में दर्ज नहीं की जाती थी। बिक्री की रकम नियमित गल्ले से अलग रखी जाती थी, जिसे बाद में सिंडिकेट के नकद संग्रहकर्ताओं को दिया जाता था। एजेंसी संचालकों को इस अवैध कार्य की जानकारी थी, फिर भी अपने अधीन कर्मचारियों से यह काम लगातार कराया गया। कर्मचारियों के कथनों, नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों और कैश कलेक्शन संबंधी रिकॉर्ड से उक्त कार्यों की पुष्टि हुई है।

मैनपावर एजेंसियों को ओवरटाइम, बोनस, चार अतिरिक्त दिनों के भुगतान और सर्विस चार्ज के मद में लगभग 182.98 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान प्राप्त हुआ। कर्मचारियों ने अपने कथनों में ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों की रकम उन्हें नहीं मिलने की बात बताई है। उक्त अतिरिक्त भुगतान में से लगभग 62.99 करोड़ रुपये नकद तथा बैंक माध्यम से सिंडिकेट को कमीशन के रूप में दिए जाने के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।

कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान एन.व्ही. डिस्टिलरी, सिलतरा, रायपुर का नियमित संचालन बंद होने के बाद भी वहाँ पहले से रखी शराब की अवैध निकासी, परिवहन और बिक्री की गई। अमित सिंह तथा अनुराग द्विवेदी के माध्यम से मजदूरों और वाहनों की व्यवस्था कर शराब होटल ग्रैंड इम्पीरिया, होटल शेमरॉक तथा अन्य होटल-बार तक पहुंचाई गई। उक्त शराब अधिक कीमत पर बेची जाती थी। बिक्री में बराबर रकम अनवर ढेबर को दी जाती थी और उससे अधिक प्राप्त रकम विक्रेता अपने पास रखते थे। मई 2020 में प्लांट के नियमित प्रबंधन की जानकारी और अनुमति के बिना नया उत्पादन होने का विवरण भी प्राप्त हुआ है। इससे संबंधित गवाहों के कथन, उत्पादन अभिलेख, परिवहन का विवरण और चैट चालान में शामिल किए गए हैं।

शराब की अवैध बिक्री और कमीशन से प्राप्त नकद रकम विकास अग्रवाल उर्फ सुब्बू तथा उसके सहयोगियों के माध्यम से सुमित कुमार मालू उर्फ टिंकू मालू, रवि बजाज और अन्य हवाला कारोबारियों तक पहुंचाई जाती थी। इसके बाद हवाला तथा आंगड़िया नेटवर्क से दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, राजकोट और अन्य शहरों में रकम उपलब्ध कराई जाती थी। श्रीजी आंगड़िया नेटवर्क के संचालक कुमार भाई ठक्कर उर्फ खंजन ठक्कर द्वारा मुंबई में प्राप्त रकम के बदले दुबई में विकास अग्रवाल को भुगतान उपलब्ध कराया गया। संबंधित गवाहों के कथनों, हिसाब की शीट और मोबाईल से प्राप्त एक्सेल रिकॉर्ड में रकम, टोकन नंबर तथा भेजने और प्राप्त करने वाले व्यक्तियों का विवरण मिला है।

अपराध से प्राप्त नकद रकम दिल्ली पहुंचाकर NBFC और शेल कंपनियों के माध्यम से संबंधित फर्मों और कंपनियों के खातों में बैंक एंट्री प्राप्त की गई। सफायर इस्पात, ए.जे.एस. एग्रो ट्रेड, बी.एन.एन. मल्टीमीडिया तथा अन्य संबंधित संस्थाओं के खातों में RTGS से प्राप्त उक्त रकम को अनसिक्योर्ड लोन दिखाया गया। इसके बाद रकम एक कंपनी या फर्म से दूसरी में भेजकर भूमि, अन्य अचल संपत्तियों और व्यवसायों में लगाई गई। प्राइम डेवलपर्स, ए. ढेबर बिल्डकॉन, इंडियन बिल्डकॉन तथा ढेबर समूह की अन्य कंपनियों के बैंक खातों, लेखों और संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड में इन लेन-देन का विवरण मिला है। इस प्रकार नकद रकम के वास्तविक स्रोत को छिपाकर उसे लोन और बैंक माध्यम से प्राप्त राशि के रूप में दिखाया गया। सफायर इस्पात के माध्यम से प्राप्त रकम का लैंको सोलर पावर प्लांट के अधिग्रहण में उपयोग किए जाने के साक्ष्य भी मिले हैं।

पिंकी सिंह की फर्म अदिप एम्पायर में सिंडिकेट से प्राप्त रकम को व्यापारिक लाभ के रूप में दिखाया गया। आपूर्तिकर्ताओं को खातों के बाहर नकद भुगतान करके उनकी देनदारियाँ खातों में बनाए रखी गईं और प्राप्त रकम भूमि तथा अन्य निवेशों में लगाई गई। शंभूलाल सोनी के नाम की फर्म जगदम्बा इंटरप्राइजेज में वास्तविक परिवहन खर्च कम दिखाकर अधिक लाभ दर्शाया गया और अवैध नकद रकम का उपयोग वास्तविक खर्च के भुगतान में किया गया। अदिप एग्रोटेक प्रा.लि. के माध्यम से कृषि भूमि खरीदी गई और बैंक खातों में लाई गई रकम को कृषि उपज की बिक्री से प्राप्त आय दिखाकर आगे भूमि तथा अन्य अचल संपत्तियां खरीदी गईं।

ढिल्लन सिटी मॉल प्रा.लि. में FL-10A कंपनियों से प्राप्त कमीशन और अन्य संदिग्ध रकम को अनसिक्योर्ड लोन दिखाकर एफडी में रखा गया। ढिल्लन ड्रिंक्स के माध्यम से कर्मचारियों के नाम पर लोन दिखाकर रकम चैतन्य बघेल की बघेल डेवलपर्स एण्ड एसोसिएट्स के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में पहुंचाई गई। पेट्रोशन बायो रिफाइनरी प्रा.लि. द्वारा डिस्टिलरियों को कनकी-चावल की आपूर्ति में अधिक बिलिंग कर पार्ट-A कमीशन की रकम को व्यापारिक लाभ दिखाया गया और एफडीआर में रखा गया।
आशीष श्रीवास्तव द्वारा सिंडिकेट से जुड़े अधिकारियों के साथ मिलकर विभागीय नीतियों और प्रक्रियाओं को सिंडिकेट के लाभ के अनुरूप तैयार करने तथा लागू कराने में सहयोग किया गया। रत्नप्रिया आई.टी. एण्ड मीडिया प्रा.लि. के माध्यम से सिंडिकेट को तकनीकी सहायता देने, शासकीय तकनीकी संसाधनों का दुरुपयोग करने तथा अवैध आय का समायोजन करने के साक्ष्य भी मिले हैं।

फर्जी बिलिंग, ओव्हर बिलिंग तथा कृषि आय के रूप में रकम दिखाकर उसके स्रोत को छिपाने के साक्ष्य भी प्राप्त हुए हैं। प्रकरण में साक्षियों के कथन, विभागीय और कंपनी रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन, संपत्ति की रजिस्ट्रियां, Whatsapp बातचीत, कॉल विवरण तथा फॉरेंसिक रिपोर्टें शामिल हैं। मोबाइल से प्राप्त रकम के हिसाब और बातचीत का संबंधित कथनों तथा अन्य दस्तावेजों से मिलान किया गया है।

रामगोपाल अग्रवाल न्यायिक अभिरक्षा में हैं। बीआर लोहिया और कुमार भाई ठक्कर उर्फ खंजन ठक्कर के विरुद्ध फरारी में चालान प्रस्तुत किया गया है। बीआर लोहिया वर्तमान में विदेश में निवासरत है। ब्यूरो द्वारा बीआर लोहिया के विरूद्ध लुकआउट सर्कुलर जारी कराई गई है। बार-बार नोटिस दिए जाने के बाद भी पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं होने पर उनके संबंध में फरारी पंचनामा तैयार कर फरारी में चालान पेश किया गया है। इंटरपोल के सहयोग से इनके विरूद्ध अग्रिम कार्यवाही की जाएगी। विवेचना में प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर संबंधित आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धाराओं के अंतर्गत अभियोजन किया जा रहा है। प्रकरण में अन्य संबंधित व्यक्तियों, वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों के संबंध में अग्रिम विवेचना जारी है।

Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H