अरविन्द मिश्रा, बलौदा बाजार। छत्तीसगढ़ में पटवारी संघ ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। संघ के सदस्यों ने आज काले कपड़े पहनकर काला दिवस मनाया और शासन के खिलाफ विरोध जताया। पटवारियों की प्रमुख मांगों में वेतन विसंगति दूर करना, पदोन्नति देना और पीवी ऐप की जगह भुइंया ऐप से गिरदावरी का काम कराना शामिल है। संघ आज रैली निकालकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपेगा।

पटवारी संघ 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। बलौदाबाजार के दशहरा मैदान में पटवारी धरने पर बैठे हैं। आंदोलन के तहत पुरुष पटवारी काली शर्ट और टी-शर्ट पहनकर पहुंचे, जबकि महिला पटवारियों ने काली साड़ी और सूट पहनकर विरोध दर्ज कराया। संघ का कहना है कि लंबे समय से लंबित मांगों पर अब तक समाधान नहीं निकलने के कारण आंदोलन जारी रखना पड़ रहा है।

पीवी ऐप में खामियों का आरोप, भुइंया ऐप से गिरदावरी कराने की मांग

पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष रसपाल सिंह ने पीवी ऐप की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ऐप में कई खामियां हैं, जिनका असर गिरदावरी के काम और आगे किसानों को होने वाली परेशानी के रूप में सामने आ सकता है। धान खरीदी का समय नजदीक होने के कारण संघ इस मुद्दे को अहम बता रहा है।

रसपाल सिंह के मुताबिक, पटवारियों ने ऐप को लेकर अपनी आपत्तियां उठाई थीं, लेकिन इसके बाद भी उनकी चिंताओं का समाधान नहीं हुआ। उनका कहना है कि शासन को या तो पटवारी संघ से बातचीत कर पीवी ऐप की खामियां दूर करनी चाहिए या फिर भुइंया ऐप से ही गिरदावरी का काम जारी रखना चाहिए।

उन्होंने वेतन विसंगति दूर करने और पदोन्नति की मांग भी जल्द पूरी करने की बात कही। सिंह ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो धान खरीदी के दौरान किसानों को परेशानी हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि तहसीलदार स्तर के अधिकारी भी पटवारियों की मांगों का समर्थन कर रहे हैं।

पटवारी संघ ने बताया किसान हित का आंदोलन

संघ की प्रवक्ता रश्मि उपाध्याय ने कहा कि पटवारी काले कपड़े पहनकर इसलिए प्रदर्शन कर रहे हैं, ताकि उनकी बात मुख्यमंत्री तक पहुंचे। उन्होंने धान खरीदी की प्रस्तावित तारीख 15 नवंबर का हवाला देते हुए कहा कि गिरदावरी का काम पूरा नहीं होने पर किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

रश्मि उपाध्याय के मुताबिक, पटवारी किसान और शासन के बीच अहम कड़ी हैं। ऐसे में उनकी मांगों को केवल कर्मचारियों से जुड़ा मामला नहीं माना जाना चाहिए। संघ का कहना है कि गिरदावरी व्यवस्था में आने वाली दिक्कतों का असर सीधे किसानों पर पड़ सकता है, इसलिए शासन को जल्द फैसला लेना चाहिए।

कनिष्ठ प्रशासनिक संघ ने भी दिया समर्थन

पटवारी संघ के आंदोलन को कनिष्ठ प्रशासनिक संघ का भी समर्थन मिला है। बीते दिनों संघ के प्रांताध्यक्ष पेखन टोण्डे अपने साथियों के साथ बलौदाबाजार के दशहरा मैदान स्थित धरना स्थल पहुंचे थे। उन्होंने पटवारियों की मांगों को जायज बताते हुए आंदोलन को समर्थन दिया।

फिलहाल पटवारी संघ अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है। संघ ने काला दिवस मनाने के साथ रैली निकालकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने की तैयारी की है। अब देखना होगा कि शासन की ओर से मांगों पर बातचीत या समाधान को लेकर क्या कदम उठाया जाता है।

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