Odisha Desk, भुवनेश्वर: पुरी केवल एक जिला नहीं, बल्कि ओडिशा का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक हृदय है। इसी भावना को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मंगलवार को पुरी शहर के समग्र और विश्वस्तरीय विकास का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक परिवर्तन के केंद्र में पुरी के स्थानीय निवासी और श्रीमंदिर के सेवायत रहेंगे।
लोक सेवा भवन में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सभी चालू और प्रस्तावित परियोजनाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के दौरान शहर की अद्वितीय धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
बैठक के दौरान पुरी के व्यापक विकास के लिए तैयार किए गए विस्तृत ब्लूप्रिंट की समीक्षा की गई। इसमें पुलों के जीर्णोद्धार, समुद्र तटों के सौंदर्यीकरण और श्री जगन्नाथ मंदिर के आसपास के क्षेत्रों के विकास की योजनाएं शामिल हैं।
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को सूचित किया कि प्रस्तावित ‘श्री जगन्नाथ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे’ (Shree Jagannath International Airport) से जुड़े कार्यों में तेजी लाई जा रही है। इसके अतिरिक्त, ऐतिहासिक रघुनंदन पुस्तकालय के आधुनिकीकरण और बड़ दांड तथा श्री सेतु के आसपास व्यवसाय करने वाले स्ट्रीट वेंडरों के व्यवस्थित पुनर्वास की योजनाओं पर भी गहन चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने महाप्रभु श्री जगन्नाथ के सभी नीति-कांति (अनुष्ठानों) के सुचारू संचालन और सेवायतों के सामाजिक-आर्थिक कल्याण पर विशेष बल दिया। कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बैठक में बताया कि सेवायतों और उनके परिवारों की सहायता के लिए समर्पित कदम उठाए जाएंगे।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सेवायतों की आने वाली पीढ़ी अपनी सदियों पुरानी मंदिर परंपराओं और धार्मिक सेवाओं को जारी रखने के साथ-साथ बेहतर सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा प्राप्त कर सके।
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि पुरी आने वाले दुनिया भर के श्रद्धालुओं के लिए सुलभ दर्शन, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि पुरी एक आदर्श वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में उभर सके।
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