Rajasthan Investment News 2026: राजस्थान में निवेश और उद्योगों से जुड़ी सरकारी प्रक्रियाओं को आसान बनाने के प्रयासों के बीच सितंबर 2026 में 11,739.27 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव दर्ज किए गए। वहीं, अप्रैल से सितंबर के छह महीनों में 31,892 आवेदनों को मंजूरी मिली। यह संख्या वित्त वर्ष 2025-26 में दी गई 29,536 स्वीकृतियों से भी ज्यादा है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने डीरेगुलेशन एंड कम्प्लायंस रिडक्शन फेज-1 की मासिक प्रभाव आकलन रिपोर्ट जारी करते हुए ये आंकड़े साझा किए।

रक्षा क्षेत्र में सबसे ज्यादा निवेश प्रस्ताव

सितंबर 2026 में निवेश प्रस्तावों के मामले में रक्षा क्षेत्र सबसे आगे रहा। इस क्षेत्र में 4,840 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव दर्ज किए गए। पर्यटन एवं आतिथ्य क्षेत्र में 3,058 करोड़ रुपये, सौर उपकरण निर्माण में 1,000 करोड़ रुपये और अचल संपत्ति क्षेत्र में 744 करोड़ रुपये के प्रस्ताव आए। रिपोर्ट के मुताबिक, इन चार क्षेत्रों की कुल प्रस्तावित निवेश राशि में करीब 82 प्रतिशत हिस्सेदारी रही। इससे सितंबर के दौरान इन क्षेत्रों में निवेशकों की प्रमुख दिलचस्पी सामने आई।

23 प्राथमिकता क्षेत्रों में सुधार पूरे

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने बताया कि डीरेगुलेशन के पहले चरण में सभी 23 प्राथमिकता क्षेत्रों में सुधार पूरे कर लिए गए हैं। इनका उद्देश्य सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाना, अनुपालन का बोझ कम करना और सेवाएं तय समय में उपलब्ध कराना है। भूमि रूपांतरण की समयसीमा 90 दिन से घटाकर 45 दिन कर दी गई है। जयपुर विद्युत वितरण निगम में स्थायी बिजली कनेक्शन के आवेदन के निस्तारण का समय 10 दिन से घटाकर 4 दिन किया गया है। वहीं, विधिक मापविज्ञान से जुड़े आवेदनों के निस्तारण की अवधि 12 दिन से घटाकर 6 दिन कर दी गई है।

सिंगल विंडो व्यवस्था में आए 60 हजार से ज्यादा आवेदन

राजस्थान की एकल खिड़की व्यवस्था यानी सिंगल विंडो सिस्टम के तहत अब 190 सेवाएं उपलब्ध हैं। अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान इस व्यवस्था पर 60,229 आवेदन प्राप्त हुए। इसकी तुलना में पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में 34,704 आवेदन आए थे। सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली 10 सेवाओं के लिए 51,548 आवेदन मिले। यह कुल आवेदनों का करीब 86 प्रतिशत है। आवेदन निस्तारण की दर भी अगस्त के 47 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 52 प्रतिशत हो गई।

जयपुर स्वीकृतियों में पहले नंबर पर

जिलावार आंकड़ों में जयपुर 5,501 स्वीकृतियों के साथ सबसे आगे रहा। जोधपुर में 2,577, अजमेर में 1,808, कोटा में 1,452 और हनुमानगढ़ में 1,238 स्वीकृतियां दी गईं। डीडवाना-कुचामन, सीकर, भीलवाड़ा, अलवर और उदयपुर भी अग्रणी जिलों में शामिल रहे। रिपोर्ट में जिलावार आंकड़ों के आधार पर निवेशकों को आ रही दिक्कतों की पहचान करने और संबंधित सेवाओं में सुधार पर जोर दिया गया है।

पर्यावरणीय नियमों में भी किए गए बदलाव

पर्यावरण से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। श्वेत श्रेणी में शामिल गतिविधियों की संख्या 104 से बढ़ाकर 877 कर दी गई है। इसके साथ समयबद्ध मंजूरी, स्वप्रमाणन, जोखिम आधारित निरीक्षण और पारदर्शी निगरानी व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है।

रीको परियोजनाओं में 1,080 करोड़ के निवेश का प्रस्ताव

रीको के भूमि आवंटन से जुड़ी परियोजनाओं में करीब 1,080 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। इन परियोजनाओं से लगभग 2,100 रोजगार अवसर पैदा होने की संभावना जताई गई है। पर्यावरणीय मंजूरी की जरूरत वाली और अन्य परियोजनाओं के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया को भी आसान बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

डीरेगुलेशन प्रकोष्ठ ने अलवर के रीको औद्योगिक क्षेत्रों की चुनिंदा इकाइयों का दौरा भी किया। यहां स्वच्छ ऊर्जा, वर्षा जल संचयन, पुनर्चक्रण, कर्मचारी प्रशिक्षण, सुरक्षा व्यवस्था और संसाधनों के बेहतर उपयोग से जुड़ी पहलों का अध्ययन किया गया। मुख्य सचिव के मुताबिक, इन सुधारों का लक्ष्य निवेशकों और उद्यमियों के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाना, अनुपालन संबंधी बाधाएं कम करना और सरकारी सेवाओं को समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराना है।

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