Bihar News: दुलारचंद यादव हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनंत सिंह की जमानत रद्द किए जाने और 1 दिसंबर तक सरेंडर करने के आदेश पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की प्रतिक्रिया सामने आई है। पटना पहुंचे चिराग पासवान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि, ये न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। मुझे लगता है कि जो न्यायिक प्रक्रिया है उस पर किसी को टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। हम सब न्यायपालिका का सम्मान करते हैं।
गौरतलब है कि आज ही के दिन पिछले साल 30 अक्टूबर 2025 के दिन दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी। यह घटना बिहार के मोकामा विधानसभा क्षेत्र के टाल गांव में चुनाव प्रचार के दौरान दो पक्षों के बीच हुई झड़प के दौरान हुई थी। इस मामले में मोकामा से बाहुबली विधायक अनंत सिंह मुख्य आरोपी हैं।
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर ‘मॉक पार्लियामेंट’ के आयोजन पर चिराग पासवान ने कहा कि, बचपन में हम लोग इस तरीके से स्कूल में, कॉलेजों में मॉक पार्लियामेंट तैयार करके प्रैक्टिस करते थे कि कैसे सदन में कार्रवाई होती होगी। ऐसे में ये वो लोग हैं, जो सदन के सदस्य हैं। इस तरीके से मॉक पार्लियामेंट या पार्लियामेंट की नकल करना कितना जायज है, ये इनको खुद तय करना है। पर मैं मानता हूं कि जब अपनी बातों को रखने के लिए सदन मौजूद है, तो आप उसका इस्तेमाल कीजिए।
1 नवंबर को होने वाली इंडिया गठबंधन की रैली पर चिराग पासवान ने कहा कि, मुझे नहीं पता ये संयोग है या क्या है? पर कम से कम इतनी चिंता तो इनको रखनी चाहिए थी कि इस तारीख के अलग-अलग मायने भी हैं। ये एक तारीख वो तारीख है, जब दिल्ली की इसी धरती पर सिखों का नरसंहार किया गया था। पंजाब के चुनाव सामने हैं और कांग्रेस इस तरीके से सिखों के नरसंहार के दिन पर इस तरीके से रैली करके, शक्ति प्रदर्शन करके, अपनी ताकत दिखाकर उन लोगों के जले पर नमक छिड़कने का काम करने जा रही है, जिन्होंने उस नरसंहार में अपनों को खोया था।
अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के ‘अर्बन नक्सल’ वाले बयान पर भी चिराग पासवान की प्रतिक्रिया सामने आई। उन्होंने कहा कि, दिमागी नक्सल देश में बंटवारे की सोच को बढ़ावा देना है। दिमागी नक्सल देश की मौजूदा व्यवस्था को तबाह करके यहां पर सत्ता परिवर्तन ताकत से, बल से हासिल करना है, जो हम लोग अपने पड़ोसी देश पाकिस्तान में देखते रहे हैं। पाकिस्तान में जिस तरीके से सत्ता परिवर्तन बल के द्वारा, सेना के दुरुपयोग के द्वारा किया जाता है, यह सोच दिमागी नक्सलिज़्म को दर्शाती है।

