CJP Leader Saurav Das React On Pm Modi Gen-Z style Post: अब भारत ने क्रिटिकल मिनरल के लिए चीन पर निर्भरता कम करने की तैयारी में है। भारत लिथियम, निकेल और कोबाल्ट जैसे अन्य क्रिटिकल मिनरल की प्रोसेसिंग के लिए भारत में प्लांट बनाने की योजना तैयार की है। केंद्र सरकार ने ₹2,814 करोड़ की नई स्कीम को मंजूरी दी है। इसके तहत देश में चार प्रोसेसिंग प्लांट लगाए जाएंगे। पीएम नरेंद्र मोदी ने क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग योजना को मंजूरी देने की जानकारी सोशल मीडिया पर पोस्ट की। हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने ये पोस्ट जेन-जी स्टाइल में की। पीएम मोदी का ‘Gen-Z’ अंदाज पोस्ट करना सीजेपी नेता सौरव दास को पसंद नहीं आया। सौरव दास ने यहां भी पीएम मोदी को नसीहत दे डाली।
पीएम मोदी के पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए सौरव दास ने लिखा- ‘यो, कृपया ऐसे ट्वीट लिखें जैसे गंभीर पदों पर बैठे सामान्य लोग लिखते हैं। यह जरूरत से ज्यादा जेन-जी बनने की कोशिश जैसा और सच कहूं तो काफी असहज करने वाला लगता है। नीतियां गंभीर हों या नहीं, कम से कम गंभीर लेखन को तो मत छोड़िए।
दरअसल पीएम मोदी ने महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण में भारत की आत्मनिर्भरता को लेकर एक पोस्ट साझा किया था। इसमें उन्होंने युवाओं के बीच लोकप्रिय अनौपचारिक भाषा और छोटे-छोटे वाक्यों का इस्तेमाल करते हुए सरकार की नई योजना की जानकारी दी थी। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पोस्ट में सवाल किया कि- क्या भारत को अपने भविष्य की तकनीकों को ताकत देने वाले महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना चाहिए? उन्होंने जवाब देते हुए लिखा- मैं तो बिल्कुल नहीं चाहता। पीएम मोदी ने लिथियम, निकल और कोबाल्ट जैसे खनिजों का जिक्र करते हुए बताया कि ये इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी), बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र के लिए बेहद जरूरी हैं. इसके बावजूद भारत प्रसंस्कृत खनिजों के लिए बड़े स्तर पर दूसरे देशों पर निर्भर है. इस निर्भरता को कम करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नई योजना को मंजूरी दी है।
क्या है क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग योजना?
दरअसल, प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने के लिए 2,814 करोड़ रुपये की पूंजीगत सहायता योजना को मंजूरी दी है। यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए लागू होगी। इसका उद्देश्य देश में लिथियम और निकल जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण की घरेलू क्षमता विकसित करना और आयात पर निर्भरता कम करना है। योजना के तहत चार प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए जाएंगे. इनमें लिथियम के दो और निकल के दो संयंत्र शामिल होंगे। प्रत्येक लिथियम संयंत्र की न्यूनतम क्षमता 30 हजार टन और प्रत्येक निकल संयंत्र की न्यूनतम क्षमता 50 हजार टन निर्धारित की गई है।
ईवी, बैटरी और रक्षा क्षेत्र को मिलेगा फायदा
सरकार का मानना है कि घरेलू स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण की क्षमता बढ़ने से इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा और विशेष इस्पात जैसे क्षेत्रों को फायदा होगा। फिलहाल इन खनिजों के प्रसंस्करण का बड़ा हिस्सा दुनिया के कुछ चुनिंदा देशों में केंद्रित है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय तनाव, कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति में बाधा का असर भारत पर भी पड़ सकता है।
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