रायपुर। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग की संस्था ‘संवाद’ में बरसों से चल रहे करोड़ों रुपये के प्रिंटिंग और होर्डिंग घोटाले पर राज्य सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तक जब इन माफियाओं की शिकायतें पहुंचीं, तो उन्होंने तत्काल सिस्टम को दुरुस्त करने के निर्देश दिए। इस पूरी क्लीन-अप ड्राइव को लेकर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह और जनसंपर्क सचिव रोहित यादव भी बेहद गंभीर थे। शीर्ष स्तर से मिले निर्देशों के बाद जनसंपर्क आयुक्त और संवाद के सीईओ रजत बंसल ने मोर्चा संभाला और दशकों से जमे भ्रष्ट तंत्र पर कड़ा प्रहार किया। कार्रवाई की शुरुआत संवाद में पिछले 25 सालों से प्रिंटिंग विभाग के होलसोल इंचार्ज रहे सब्यसाची कर की बर्खास्तगी से हुई।
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि साल 2011 में ही एक जांच कमेटी ने सब्यसाची की नियुक्ति को अवैधानिक ठहरा दिया था, लेकिन विभागीय साठगांठ के चलते तब उनकी फाइल दबा दी गई थी। अफसर को हटाने के साथ ही होर्डिंग माफियाओं पर भी नकेल कसी गई। ये माफिया तय समय से पहले ही सरकारी होर्डिंग निकालकर वहां प्राइवेट विज्ञापन लगा देते थे और बिना किसी चेकिंग के पूरे सरकारी बिल का पैसा निकाल लेते थे, जिस पर अब पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा खुलासा 33.74 करोड़ रुपये के पुस्तक घोटाले का हुआ। दरअसल समग्र शिक्षा विभाग की किताबें छापने का जिम्मा संवाद को मिला था, जिसके तहत 6 फरवरी 2026 को 10 प्रकाशकों को कार्यादेश जारी किया गया। लेकिन इनमें से 8 प्रिंटरों ने किताबों की साइज छोटी कर दी, कम जीएसएम का हल्का पेपर इस्तेमाल किया और तय संख्या से कम किताबें छापीं। जानकारों के मुताबिक इस हेराफेरी से सरकार को कम से कम 10 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ। प्रिंटरों के हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने अगले टेंडर पर पूरी तरह कब्जा जमाने के लिए चंदा इकट्ठा कर एक होटल में बाकायदा अपना ऑफिस खोल लिया था। लेकिन आपस में ही विवाद होने के चलते उनकी इस व्यूहरचना का भंडाफोड़ हो गया। मामला मुख्यमंत्री सचिवालय तक पहुंचा, जिसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर संवाद के शीर्ष अधिकारियों ने उस टेंडर को ही तत्काल निरस्त कर दिया।
प्रिंटरों के इस काले कारनामे को पकड़ने के लिए संवाद के सीईओ रजत बंसल ने एक खास रणनीति अपनाई। पहले प्रिंटर सही साइज और अच्छी क्वालिटी का सैंपल जमा कर देते थे और बाद में जिलों में घटिया माल भेजकर अपना पूरा पेमेंट पास करवा लेते थे। लेकिन इस बार ट्रांसपोर्टिंग के दौरान बीच रास्ते में गाड़ियों की गोपनीय सैंपलिंग कराई गई, जिसमें 8 प्रिंटर रंगे हाथों पकड़े गए। इस धांधली पर कड़ा रुख अपनाते हुए पहली बार प्रिंटरों के बिल से सीधे साढ़े तीन करोड़ रुपये की कटौती कर ली गई, जिससे माफियाओं में हड़कंप मच गया।
केवल ठेकेदारों पर ही नहीं बल्कि विभागीय लापरवाही पर भी गाज गिरी है। जनसंपर्क आयुक्त ने काम में घोर लापरवाही बरतने के आरोप में तीन जिलों के जनसंपर्क अधिकारियों को भी कारण बताओ नोटिस थमा दिया है। उन्हें सख्त चेतावनी दी गई है कि यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं मिला, तो एकाध पीआरओ को सस्पेंड भी किया जा सकता है। राज्य बनने के बाद से ही संवाद में अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत से चल रहे इस काले खेल पर यह पहली सबसे बड़ी और निर्णायक चोट है।

