जम्मू-कश्मीर पुलिस ने शोपियां में आतंकियों की फंडिंग के जरिए मदद करने वाले एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) से जुड़े 10 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क के संबंध जम्मू-कश्मीर की अलग-अलग जेलों में बंद आतंकियों और उनके सहयोगियों से थे। मामले में और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।

जांच में पता चला है कि आरोपी कश्मीर के आम लोगों से चुपके से जिहाद के नाम पर पैसे जुटाते थे। इसके बाद इन पैसों को खास वित्तीय नेटवर्क के जरिए आतंकियों तक पहुंचाया जाता था, ताकि उनकी गतिविधियों में मदद की जा सके। जम्मू-कश्मीर में पिछले 68 दिनों में 28 आतंकी सहयोगी गिरफ्तार किए गए। पहलगाम हमला इसी तरह के नेटवर्क के जरिए अंजाम दिया गया था।

शोपियां, पुलवामा और कठुआ के रहने वाले हैं आरोपी

गिरफ्तार आरोपियों में शोपियां के सैदपोरा बाला के ओवैस शफी नाइकू, रावलपोरा के तजामुल अहमद शाह, चित्रगाम कलां के मोज इरबाल और इमदाद यूसुफ गनई शामिल हैं। इसके अलावा पुलवामा के मुर्रन के साकिब जहूर वानी और लियाकत नजीर लोन, अरमोह के आमिर अहमद गनई, शोपियां के ट्रेंज स्थित नादिगुंड के फिरदौस ठोकर और कठुआ के चेक हरिया के मोहम्मद हनीफ और काजू को भी गिरफ्तार किया गया है।

ऑनलाइन लेनदेन की जांच में खुला आतंकी फंडिंग नेटवर्क

पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान अलग-अलग पेमेंट प्लेटफॉर्म से किए गए कई संदिग्ध ऑनलाइन लेनदेन का पता चला। इनकी जांच में आतंकी फंडिंग से जुड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ। इस मामले में शोपियां पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी लोगों से लिए पैसे से आतंकियों को स्मार्टफोन और दूसरी जरूरी सुविधाएं मुहैया कराते थे। पुलिस मामले की जांच कर रही है। नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है। पुलिस ने कहा कि इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

2019 में आर्टिकल-370 हटने के बाद अस्तित्व में आया TRF

जम्मू-कश्मीर के आतंकी संगठनों में ‘द रजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) नया नाम है। 2019 में जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल-370 हटाए जाने के बाद यह अस्तित्व में आया। भारत सरकार भी मानती है कि ये लश्कर-ए-तैयबा का प्रॉक्सी आतंकी संगठन है।

ये आतंकी संगठन जवानों और आम नागरिकों की हत्या के अलावा सीमा पार से ड्रग्स और हथियार की तस्करी में शामिल रहा है। सुरक्षा मामलों के जानकार बताते हैं कि सीमा पार से ISI हैंडलर्स ने ही लश्कर-ए-तैयबा की मदद से TRF को खड़ा किया।

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