पुरुषोत्तम पात्र, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देवभोग ब्लॉक में खराब पानी के कारण केवल सुपेबेड़ा में ही ग्रामीणों का सेहत खराब नहीं है, बल्कि ब्लॉक मुख्यालय में भी दूषित पानी का दंश लोग वर्षों से झेल रहे हैं। पिछेल 6 सालों में देवभोग मुख्यालय में किडनी की बीमारी से 15 से ज्यादा लोगों की मौत चुकी है। ये सभी उस वार्ड में रहते हैं, जहां के पानी में डीटीएस की मात्रा 800 से 1200 प्रति मिली ग्राम है। अकेले वार्ड 3 में किडनी की बीमारी से 8 लोगों की मौत हो चुकी है।
लल्लूराम डॉट कॉम ने दूषित जल को लेकर वार्ड क्रमांक 3 में सघन जानकारी जुटाई, जहां से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। नगर पंचायत के वार्ड 3 में 350 की आबादी रहती है। यहां 3 सार्वजनिक नल कनेक्शन के अलावा 80 निजी बोर कनेक्शन मौजूद हैं। इनमें से 50 से ज्यादा कनेक्शन में टीडीएस काउंट 800 से 1200 प्रति मिली ग्राम है। ऐसे में किडनी रोगियों की संख्या यहां ज्यादा हैं।
जानकारी के मुताबिक वार्ड 3 में किडनी रोग से पीड़ित रविशंकर निषाद, चरण निषाद, अभिमन्यु सेन और खीरोबाई ठाकुर की मौत 2019 में हुई। शिक्षक खगेश्वर ठाकुर 2021 में चल बसे, रामेश्वर यादव, प्रेमसिंह ठाकुर की मौत 2023 में हुई। वहीं वार्ड 3 में रहने वाले एक सरकारी कर्मी किडनी ट्रांसप्लांट के बाद डायलिसिस के सहारे स्वास्थ्य लाभ ले रहे। इन्हें पत्नी ने अपना एक किडनी दिया है।


चुनिंदा स्थानों से लाते हैं पीने का पानी
किडनी की बीमारी से अपने माता-पिता को खो चुके भजन ठाकुर ने बताया कि उनके निवास स्थल के आसपास के पेयजल स्रोतों का टीडीएस लेबल बहुत हाई है। पहले लापरवाही से माता-पिता को खो चुका हूं इसलिए अब पीने के लिए पानी 600 मीटर दूर स्थित स्रोत से लाते हैं। मोहल्ले में अधिकांश लोग वार्ड 3 में सोलर स्थित पंप से लाते हैं, क्योंकि वहां टीडीएस सामान्य बताया गया है। घनश्याम ठाकुर ने कहा कि सुबह परिवार के साथ अपने खेत जाते हैं और रोजाना दिनभर उपयोग के लायक पानी लेकर आते हैं। वार्ड 3 में इकलौता पेयजल लायक सोर्स का सोलर सिस्टम महीनों से बंद पड़ा है। समाधान शिविर में दिए गए आवेदनों के बावजूद इस समस्या का समाधान नहीं हो सका। हैडपंप से पानी ले जाते हैं। घर-घर तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था भी ठप पड़ी है।

500 TDS प्रति मिलीग्राम मान्य, जांच में मिला 300 मिलीग्राम अधिकतम
पीएचई विभाग के उपयंत्री बीएस सिदार ने बताया कि 300 से 500 टीडीएस प्रति मिलीग्राम उपलब्धता पेयजल में स्वीकार्य है।नगरवासियों की मांग पर वार्ड 3 के पेयजल स्रोतों की जांच की गई थी, जहां अधिकतम 300 मिलीग्राम पाया जाता है।

बीएमओ प्रकाश साहू ने भी बताया कि इससे ज्यादा मात्रा उपलब्धता वाले पेयजल निरंतर पिया जाए तो स्वास्थ्यगत परेशानी हो सकती है। पाचन तंत्र और हड्डी से जुड़े रोग हो सकते हैं। नगर पंचायत के वार्ड 3 में मौजूद आबादी के अनुपात में जल जनित रोगों का लक्षण नजर नहीं आ रहा, न ही इस संबंध में किसी प्रकार की सूचना या पीड़ित अस्पताल तक नहीं पहुंचा है। वार्ड 3 निवासी एक पीड़ित का सफल उपचार किया गया है।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m


