अजयारविंद नामदेव, शहडोल। जनता शिकायत करती रही, फाइलें दफ्तरों में अटकी रहीं और सीएम हेल्पलाइन पर हजार-हजार दिन से मामले लंबित पड़े रहे, अब शहडोल में ऐसी लापरवाही पर कलेक्टर पार्थ जायसवाल का सख्त एक्शन सामने आया है। तीन तहसीलदारों को अवैतनिक करने के निर्देश, कुछ विभागों के अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस और 1000 दिन से ज्यादा लंबित शिकायतों का अगली बैठक तक निराकरण नहीं हुआ, तो वेतन आहरण पर रोक, सवाल साफ है,  जब शिकायतों का समाधान ही नहीं हो रहा, तो जिम्मेदार अधिकारी आखिर कर क्या रहे हैं।

सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के निराकरण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर अब कार्रवाई की तलवार लटकने लगी है। शहडोल कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने समय-सीमा की बैठक में अधिकारियों को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि शिकायतों के निराकरण में लापरवाही और निम्न गुणवत्ता के साथ शिकायतें बंद करने की प्रवृत्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी, बैठक में अनअटेंडेड शिकायतें मिलने पर तीन तहसीलदारों और विद्युत विभाग के कनिष्ठ अभियंता, देवलोंद को अवैतनिक करने के निर्देश दिए गए। वहीं, सीएम हेल्पलाइन के प्रकरणों में ग्रेड-ए नहीं आने पर तकनीकी शिक्षा विभाग, जेल विभाग और आयुष विभाग के अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।

कलेक्टर कार्यालय के विराट सभागार में आयोजित बैठक में कलेक्टर ने 50 दिवस से अधिक समय से लंबित शिकायतों की समीक्षा करते हुए प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने के निर्देश दिए, उन्होंने कहा कि सभी विभाग पिछले महीने की तुलना में बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करें, शिकायतों को बिना उचित समाधान के बंद करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

1000 दिन से लंबित शिकायतों पर सख्ती

बैठक में एक हजार दिवस से अधिक समय से लंबित शिकायतों को लेकर कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाया, उन्होंने संबंधित अधिकारियों को अगली बैठक तक इन प्रकरणों का निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, तय समय-सीमा में शिकायतों का समाधान नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों के वेतन आहरण पर रोक लगाने की कार्रवाई की जाएगी।

इसके अलावा सीएम हाउस, सीएम मॉनिट और विभिन्न आयोगों से प्राप्त शिकायतों की भी समीक्षा की गई, कलेक्टर ने अधिकारियों को समय-सीमा में जवाब प्रस्तुत करने और लंबित मामलों की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि नागरिकों की समस्याओं का समय पर समाधान प्रशासन की प्राथमिकता है। सीएम हेल्पलाइन पर आने वाली शिकायतों को गंभीरता से लेना होगा, अन्यथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

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