देवघर। शारदीय नवरात्रि के बीच झारखंड में महाष्टमी, महानवमी और विजयादशमी की तिथियों को लेकर श्रद्धालुओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कहीं रविवार की देर रात महाष्टमी की पूजा हुई, तो कहीं सोमवार की सुबह तक मां दुर्गा की आराधना जारी रही। अलग-अलग पंचांग और क्षेत्रीय परंपराओं के कारण पूजा की तिथियों में अंतर देखने को मिल रहा है। वहीं, देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ मंदिर में बंगला पंचांग के अनुसार बुधवार को विजयादशमी मनाई जाएगी।

बाबा बैद्यनाथ धाम में महानवमी पर विशेष अनुष्ठान

बाबा बैद्यनाथ मंदिर में दुर्गा पूजा की विशिष्ट परंपरा रही है। मंदिर के पुरोहितों के अनुसार, अष्टमी की पूजा संपन्न होने के बाद महानवमी के अनुष्ठान शुरू हो गए हैं। मंगलवार को महानवमी के अवसर पर तांत्रिक विधि-विधान से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाएगी। इस दौरान हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के साथ परंपरा के अनुसार बलि की रस्म भी निभाई जाएगी।

मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा को महानवमी पर विशेष महत्व दिया जाता है। श्रद्धालु मां की आराधना कर सुख, शांति, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।

बंगला पंचांग के अनुसार बुधवार को विजयादशमी

बाबा बैद्यनाथ मंदिर में बंगला पंचांग के अनुसार पूजा-अर्चना की परंपरा का पालन किया जाता है। इसी के तहत यहां बुधवार को विजयादशमी मनाई जाएगी। मंदिर की परंपरा के अनुसार, बुधवार दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर दशमी पूजा का शुभ मुहूर्त बताया गया है।

हालांकि, अन्य पंचांगों और स्थानीय परंपराओं के अनुसार कुछ स्थानों पर मंगलवार को ही दशमी की पूजा और नवरात्रि का समापन किया जा सकता है। इसी वजह से अलग-अलग क्षेत्रों में पर्व मनाने की तारीख में अंतर देखने को मिल रहा है।

दस दिनों तक हवन कुंड में होती है विशेष पूजा

बाबा बैद्यनाथ मंदिर में दुर्गा पूजा के दौरान विशेष हवन कुंड में दस दिनों तक विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। पुरोहितों के मार्गदर्शन में मंत्रोच्चार, हवन और धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं। पूजा पूरी होने के बाद परंपरा के अनुसार हवन कुंड को अगले एक वर्ष के लिए बंद कर दिया जाता है। अगले साल दुर्गा पूजा के अवसर पर इसे फिर खोला जाता है।

विजयादशमी को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था। वहीं, मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय की स्मृति में भी यह पर्व मनाया जाता है।

बासुकीनाथ धाम में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

दुमका जिले के प्रसिद्ध तीर्थस्थल बाबा बासुकीनाथ धाम सहित जरमुंडी प्रखंड के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने बाबा भोलेनाथ, माता पार्वती और मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की। महानवमी के अवसर पर दुर्गा मंदिरों में दीप प्रज्वलित करने के लिए महिलाओं की भी बड़ी संख्या में भीड़ पहुंची।

पंडा धर्मरक्षिणी सभा के अध्यक्ष मनोज पंडा के अनुसार, सूर्योदय के बाद महानवमी तिथि शुरू हो गई थी। हालांकि, उदय और अस्त की मान्यताओं के अनुसार महाष्टमी, महानवमी और विजयादशमी के आयोजन की तिथियों में स्थानीय परंपराओं के मुताबिक अंतर देखने को मिल रहा है।

श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने दुर्गा मंदिरों में पुलिस बल की तैनाती की है। पर्व के दौरान मंदिरों और पूजा पंडालों में भक्तिमय माहौल बना हुआ है।