आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा में इस बार सामने आए विवादों को लेकर अब कांग्रेस ने राज्य सरकार और बस्तर दशहरा कमेटी को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जगदलपुर के कांग्रेस भवन में जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि 75 दिनों तक चलने वाले बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक परंपराओं और आदिवासी समाज की आस्था के साथ खिलवाड़ किया गया है। उन्होंने कहा कि इस बार जिस तरह कई पारंपरिक रस्में प्रभावित हुईं, उससे बस्तर दशहरा की गरिमा और पहचान को ठेस पहुंची है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुशील मौर्य ने रथ खींचने के दौरान हुए विवाद को लेकर शासन-प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि रथ का पहिया टूटने के बाद ग्रामीणों को विश्वास में लेकर व्यवस्था सुधारने के बजाय जेसीबी से रथ खींचा गया और ग्रामीणों पर लाठियां चलाई गईं। उन्होंने हादसे में एक ग्रामीण की मौत और दूसरे के घायल होने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मृतक के परिवार को मुआवजा देने और घायल का हाल जानने के मामले में भाजपा के जनप्रतिनिधियों की संवेदनशीलता नजर नहीं आई।

लोगों को राष्ट्रपति के सामने समस्याएं रखने का नहीं मिला मौका
कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने राष्ट्रपति के बस्तर दौरे के दौरान मुरिया दरबार को महज आठ मिनट में समाप्त किए जाने का सवाल उठाया है। उनका कहना है कि अबूझमाड़, सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा जैसे दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे लोगों को अपनी समस्याएं रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। उन्होंने काछन देवी माता की परंपरा, रथ निर्माण से जुड़े कारीगरों और जोगी रस्म को लेकर भी आपत्ति जताई। साथ ही बस्तर दशहरा के आयोजन में कृत्रिम तरीके से बस्तर दशहरा के रस्मों के दिखाए जाने को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने बस्तर दशहरा कमेटी को असफल बताते हुए राज्य सरकार पर आदिवासी समाज की भावनाओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
Lalluram.Com के व्हाट्सएप चैनल को Follow करना न भूलें.
https://whatsapp.com/channel/0029Va9ikmL6RGJ8hkYEFC2H

