शिखिल ब्यौहार, भोपाल। भोपाल प्रस्तावित मास्टर प्लान 2047 पर कांग्रेस ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। कांग्रेस का कहना है कि भोपाल की पिछली विकास योजना 2005 में ही समाप्त हो गई थी। जनवरी 2006 से पिछले 21 वर्षों से शहर अवधि-पार योजना के भरोसे चल रहा है। कांग्रेस सरकार ने अपने 15 महीने के कार्यकाल में विकास योजना 2031 का प्रारूप प्रकाशित किया था। धारा 18 और 19 की प्रक्रिया पूरी हो गई थी, 3000 से अधिक आपत्तियों पर सुनवाई भी हो चुकी थी और केवल अंतिम अधिसूचना शेष थी, लेकिन भाजपा सरकार ने उसे निरस्त कर दिया जो विधिसम्मत नहीं था।

प्रारूप में गिनाईं कानूनी खामियां

कांग्रेस प्रवक्ता अभय दुबे ने मीडिया से चर्चा के दौरान 5 बड़ी कानूनी खामियों का जिक्र किया। पहला, धारा 15 का उल्लंघन – राजपत्र में 2024 के मौजूदा भूमि उपयोग मानचित्र का उल्लेख है पर उसका न प्रकाशन हुआ, न आपत्तियां मांगी गईं। दूसरा, धारा 17 के तहत नगर विकास स्कीमों की अनंतिम सीमाएं दिखाना अनिवार्य है जो प्रारूप में नहीं है। तीसरा, धारा 34 के विलोपन (2017) से आरक्षित भूमि के मालिकों के पास कोई उपाय नहीं बचा, इसलिए TDR या लैंड पूलिंग जैसा क्षतिपूर्ति तंत्र दिया जाए। चौथा, 18 जल निकायों में से केवल बड़े तालाब का ही जलग्रहण क्षेत्र लिया गया है, सभी का अधिसूचित होना चाहिए। पांचवां, 2005 योजना के हरित क्षेत्र में किए गए बदलावों का तुलनात्मक विवरण प्रकाशित किया जाए।

योजना लोगों की नहीं, वाहनों की

दुबे ने कहा कि 45 लाख आबादी के लिए बनी यह योजना लोगों की नहीं वाहनों की आवाजाही पर आधारित है। शहर में 54% यात्राएं पैदल, साइकिल या ऑटो से होती हैं फिर भी सार्वजनिक परिवहन का कोई लक्ष्य नहीं, बस नेटवर्क, साइकिल ट्रैक या पैदल ज़ोन नक्शे पर नहीं है। TOD के नाम पर मेट्रो के दोनों ओर 500 मीटर का 9500 हेक्टेयर क्षेत्र घोषित है पर घनत्व, FAR, सस्ते आवास जैसे मूल प्रावधान टाल दिए गए हैं। 51 किमी लंबे बायपास के दोनों ओर 300-300 मीटर में 2449 हेक्टेयर सघन विकास प्रस्तावित है जिसे TOD भी कहा गया है जबकि वहां न मेट्रो है न बस लेन। यह कार पर निर्भर रिबन विकास है।

URDPFI मानकों से भी विचलन है – आवासीय भूमि 5-7% अधिक है जबकि घनत्व 28-48% कम, इसीलिए योजना क्षेत्र 601 से बढ़ाकर 1017 वर्ग किमी कर दिया गया। 4.8 लाख झुग्गीवासियों के शहर में EWS/LIG आवास के लिए भूमि आरक्षित नहीं है। हरित क्षेत्र भी मानक से कम है – प्रति व्यक्ति 10-12 वर्ग मीटर की जगह केवल 7 वर्ग मीटर दिया गया है जो मानक से 1350-2250 हेक्टेयर कम है।

पानी का अनुमान केवल 2031 तक है और 45 लाख आबादी के लिए 209 MLD (31%) पानी की कमी है जिसका स्रोत नहीं बताया गया। STP, WTP के लिए भूमि चिन्हित नहीं है। शहर को बाहर फैलाने पर 59 हजार करोड़ का खर्च बताया गया है पर कोई वित्तीय योजना नहीं है। दुबे ने मांग की कि धारा 15 के तहत भूमि उपयोग मानचित्र विधिवत अंगीकृत कर संशोधित प्रारूप पुनः प्रकाशित किया जाए और इसमें सार्वजनिक परिवहन के लक्ष्य, ठोस TOD, URDPFI अनुरूप भूमि उपयोग, सस्ते आवास और जल योजना शामिल की जाए।

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