Congress PC On Election Commission SIR Controversy: वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग में मतभेद पर इंडियन एक्सप्रेस की खुलासे पर बवाल मचा हुआ है। सभी विपक्षी पार्टियां इसे लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) और मोदी सरकार को निशाने पर लिया है। इलेक्शन कमीशन (EC) पर खुलासे को लेकर कांग्रेस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ज्ञानेश कुमार और मोदी सरकार पर चुनाव आयोग को हाईजैक करने का आरोप लगाया है। साथ ही दिल्ली-हरियाणा विधानसभा चुनाव रद्द करने की मांग कर डाली है।
कांग्रेस के सीनियर नेता और राज्यसभा सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनाव आयोग को हाईजैक करने का आरोप लगाया। सिंघवी ने CEC पर देश को भ्रमित करने का आरोप लगाते हुए दिल्ली और हरियाणा में हुए विधानसभा चुनाव को रद्द करने की मांग की।
कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा Form 6 का जिक्र करते हुए कहा कि आपके मां-बाप, दादा दादी पुराने SIR में थे या नहीं ये महत्वपूर्ण है लेकिन बाकी Documents आपका कोई काम नहीं है। ये फॉर्म तो सरकार बदल सकती है। हजारों ERO ने शिकायत की है उन्हें Access नहीं मिल रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त की तानाशाही का उदाहरण है। 38 लाख केस पश्चिम बंगाल में लोग अपील में गए हैं। 16 लाख अपील चुनाव आयोग का है। सत्तारूढ़ दल नहीं जीती वहां दलबदल किया। सिंघवी ने कहा कि सीईसी (ज्ञानेश कुमार) को शर्म से इस्तीफा देना चाहिए।
चुनाव आयोग में आंतरिक बुलडोजर चल रहा
कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग में आंतरिक बुलडोजर भी है। ज्ञानेश कुमार ने देश को सिर्फ भ्रमित नहीं किया बल्कि अपने साथियों को भ्रमित करते हुए चुनाव आयोग को हाईजैक कर लिया। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया था कि चुनाव आयोग एक बहुमत की संस्था है। ऐसे में सवाल है कि क्या EC डमी हैं और एक व्यक्ति विशेष ही चुनाव आयोग को चला रहा है।
जानें क्या है पूरा मामला
बता दें कि इंडियन एक्सप्रेस ने वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग में मतभेद को लेकर खुलासा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक कई बिंदुओं को लेकर मुख्य चुनाव आुक्त और दोनों आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू (Sukhbir Singh Sandhu) और विवेक जोशी (Vivek Joshi ) के बीच मतभेद था। सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने नए वोटरों को जोड़ने और नाम हटाने से लेकर जानकारी छिपाने पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों के बिना जानकारी दिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने फैसले लिए। शिकायत में सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी SIR, फॉर्म 6 में बदलाव, नए वोटर का रजिस्ट्रेशन, वोटर लिस्ट से नाम हटाना और जोड़ना, नाम बहाल करने के आदेशों के खिलाफ अपील, वोटर लिस्ट की सुरक्षा और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर नाराजगी जताई। दोनों चुनाव आयुक्त ने 10 महीने में 14 बार शिकायत की है।
फैसले में तीनों चुनाव आयुक्त की रजामंदी जरूरी
बता दें कि चुनाव आयोग के बड़े फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त के साथ, दो अन्य चुनाव आयुक्तों का पैनल लेता है। इनमें से दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एपआईआर में लिए फैसले पर आपत्तियां जताई है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार हैं। एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कई मसलों पर दो चुनाव आयुक्तों ने अपनी आपत्तियां जताई. उन्होंने 10 महीनों में 14 बार आपत्तियां दर्ज कराईं। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने नए वोटरों को जोड़ने और नाम हटाने से लेकर जानकारी छिपाने पर सवाल उठाए हैं। दोनों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया और फैसले आयोग के सामने बहुमत के आधार पर नहीं रखे गए।
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