हेमंत शर्मा, इंदौर। शहर के प्रतिष्ठित निजी अस्पतालों में शामिल केयर सीएचएल अस्पताल अब गंभीर प्रशासनिक कार्रवाई के घेरे में आ गया है। मरीजों के इलाज के बीच अस्पताल परिसर में निर्माण कार्य कराने और लगातार मिल रही शिकायतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। जांच में कई अनियमितताएं सामने आने के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) ने अस्पताल का पंजीयन निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू करते हुए एक माह का नोटिस जारी कर दिया है।यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब अस्पतालों से मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी मानकों का सख्ती से पालन करने की अपेक्षा की जाती है। लेकिन जांच में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिकायतों के बाद हरकत में आया प्रशासन

जानकारी के अनुसार केयर सीएचएल अस्पताल में लंबे समय से निर्माण और विस्तार का काम चल रहा था। अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि इलाज के दौरान ही निर्माण कार्य किया जा रहा है, जिससे धूल, शोर और अन्य परेशानियां पैदा हो रही हैं।शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर सीएमएचओ कार्यालय की विशेषज्ञ टीम ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। टीम में जिला स्वास्थ्य अधिकारी, इंजीनियर और अन्य तकनीकी विशेषज्ञ शामिल थे।

जांच में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि अस्पताल में मरीज भर्ती होने के बावजूद निर्माण कार्य जारी था। जांच रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि इस स्थिति से मरीजों और उनके परिजनों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता था।सूत्रों के अनुसार अस्पताल प्रबंधन को पहले भी इस संबंध में चेतावनी दी गई थी, लेकिन निर्देशों का प्रभावी पालन नहीं किया गया। यही कारण रहा कि प्रशासन को अब सख्त कार्रवाई का रास्ता अपनाना पड़ा।

कलेक्टर बोले— जांच में मिलीं कई खामियां

इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने मीडिया से चर्चा में बताया कि शिकायतें मिलने के बाद डॉक्टरों और विशेषज्ञों की टीम से जांच कराई गई थी। जांच में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। अस्पताल को एक माह का नोटिस जारी किया गया है और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।कलेक्टर के बयान से साफ है कि प्रशासन इस मामले को केवल चेतावनी तक सीमित रखने के मूड में नहीं है।

सीएमएचओ का बड़ा बयान

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. माधव हसानी ने कहा कि अस्पताल के खिलाफ लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। निरीक्षण के बाद विस्तृत प्रतिवेदन तैयार किया गया और पाया गया कि मरीजों की सुरक्षा को प्रभावित करने वाली परिस्थितियों के बीच निर्माण कार्य जारी रखा गया।उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश उपचार्यागृह तथा रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं अधिनियम 1973 एवं नियम 1997 के तहत अस्पताल को पंजीयन निरस्तीकरण की विधिवत सूचना जारी की गई है।

एक महीने में खाली करना होगा अस्पताल

स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि एक माह की अवधि के भीतर भर्ती मरीजों को डिस्चार्ज कर आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद अस्पताल में मरीजों का उपचार प्रतिबंधित किया जा सकता है।

बड़ा सवाल: मरीजों की सुरक्षा से समझौता क्यों?

इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े नियमों के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने निर्माण कार्य को प्राथमिकता क्यों दी? यदि पहले चेतावनी दी जा चुकी थी तो उसके बाद भी नियमों का पालन क्यों नहीं हुआ?अब सभी की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है। यदि आरोप और जांच रिपोर्ट में दर्ज अनियमितताएं सही साबित होती हैं तो यह इंदौर के निजी स्वास्थ्य क्षेत्र में हाल के वर्षों की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाइयों में से एक मानी जाएगी। 

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