भुवनेश्वर: ओडिशा के मुख्यमंत्री कार्यालय से अति-संवेदनशील न्यायिक रिपोर्ट गायब होने के मामले में क्राइम ब्रांच ने अपनी जांच तेज कर दी है। विशेष रूप से 2008 में हुई स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या से संबंधित जस्टिस एएस नायडू आयोग की रिपोर्ट वाली गोपनीय फाइल कहां गायब हुई, इसे लेकर जांच टीम हर पहलू की बारीकी से पड़ताल कर रही है।
जांच अधिकारी इस मुख्य बिंदु पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं कि यह फाइल कार्यालय में किस अधिकारी को सौंपी गई थी, इसे किसने प्राप्त किया और आगे किसको हस्तांतरित किया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए क्राइम ब्रांच डीजी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस लापरवाही या साजिश में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

चरणबद्ध तरीके से सभी संदिग्धों और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया जा रहा है। यदि कोई व्यक्ति नोटिस की अनदेखी करता है या बिना ठोस कारण के पेश नहीं होता है तो उसे संदिग्ध मानकर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। डीजी के इस कड़े रुख के बाद राज्य के कई प्रभावशाली प्रशासनिक अधिकारियों और पूर्व नौकरशाहों की मुश्किलें बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
इस मामले में अब तक पूर्व मुख्यमंत्री के करीबी रहे पूर्व आईएएस अधिकारी वी.के. पांडियन समेत कुल 4 वरिष्ठ अधिकारियों को समन जारी किया जा चुका है। अन्य अधिकारियों को भी पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है। ओडिशा की राजनीति में इस समय भूचाल लाने वाली एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) जैसे अति सुरक्षित और संवेदनशील ठिकाने से स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती हत्या आयोग की बेहद अहम रिपोर्ट गायब हो गई है!
जून 2024 के चुनावी नतीजों के बाद जब गृह विभाग को बाकी फाइलें वापस लौटाई गईं, तो यह खास रिपोर्ट उसमें से गायब थी। गृह विभाग ने इस संबंध में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। इतनी सुरक्षित जगह से किसी फाइल का इस तरह गायब होना महज लापरवाही नहीं, बल्कि किसी गहरी साजिश की ओर इशारा करता है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की तह तक जाने के लिए अब क्राइम ब्रांच, फॉरेक्स और डिजिटल साक्ष्य जुटाने में पूरी ताकत से जुट गई है।
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