शरद पाठक, छिंदवाड़ा। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक में मैनिखापा के समिति प्रबंधक राकेश चौकसे शराब पीते नजर आने का मामला सामने आने के बाद बैंक की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बैठक जैसी आधिकारिक और जिम्मेदाराना गतिविधि के दौरान शराब का सेवन करते दिखाई देना न केवल अनुशासनहीनता का मामला है, बल्कि उस व्यवस्था का भी आईना है जिसमें अधिकारी अपने कर्तव्यों और गरिमा को लेकर कितने गंभीर हैं।
बताया गया है कि सोमवार को बैंक के महाप्रबंधक द्वारा समितियों के कामकाज और योजनाओं की समीक्षा के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग आयोजित की गई थी। इसी दौरान एक समिति प्रबंधक शराब का पैग गटकते हुए कैमरे में नजर आया। बैठक में जिले के अन्य समिति प्रबंधक और संबंधित अधिकारी भी जुड़े हुए थे।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अधिकारी कैमरे के सामने खुलेआम ऐसी हरकत करने का दुस्साहस कर सकता है, तो उसे विभागीय कार्रवाई का डर आखिर क्यों नहीं रहा? मामला सामने आने के बावजूद यदि जिम्मेदार अधिकारी चुप्पी साधे रहते हैं तो यह केवल संबंधित कर्मचारी की गलती नहीं, बल्कि पूरी निगरानी व्यवस्था की विफलता मानी जाएगी। उच्चाधिकारियों का यह नकारापन कर्मचारियों को अप्रत्यक्ष रूप से मनमानी की छूट देने जैसा है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अफसर कार्रवाई करते हैं या फिर हर बार की तरह मामला दबाकर खानापूर्ति कर दी जाती है।
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