Lifestyle Desk :- सुबह अलार्म बजते ही उसे बंद करके पांच मिनट और सोने का मन लगभग हर किसी का करता है। कई लोग तो एक बार नहीं, बल्कि बार-बार अलार्म को स्नूज करके अपनी नींद पूरी करने की कोशिश करते हैं। उन्हें लगता है कि कुछ मिनट की अतिरिक्त नींद से शरीर को आराम मिलेगा और दिन की शुरुआत बेहतर होगी। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रोजाना ऐसा करना आपकी नींद और सेहत पर असर डाल सकता है?
नींद पूरी होने के बावजूद सुबह उठने में परेशानी होना या अलार्म बंद करके दोबारा सो जाना आपकी दिनचर्या का हिस्सा बन सकता है। बार-बार अलार्म स्नूज करने से नींद की प्रक्रिया बाधित हो सकती है। स्नूज अलार्म के दौरान नींद की अवस्थाओं में अधिक बदलाव और जागने के बाद सुस्ती देखी गई। आइए जानते हैं कि बार-बार अलार्म बंद करके सोने की आदत से क्या समस्याएं हो सकती हैं और इससे कैसे बचा जाए।

क्या होता है स्नूज अलार्म?

स्नूज अलार्म का मतलब है कि जब सुबह अलार्म बजता है, तो आप उसे पूरी तरह बंद करने के बजाय कुछ मिनट के लिए टाल देते हैं। आमतौर पर यह समय 5 से 10 मिनट का होता है। इस दौरान व्यक्ति दोबारा सो जाता है और फिर अलार्म बजने पर उठने की कोशिश करता है।
कई लोगों को लगता है कि ऐसा करने से नींद पूरी हो जाएगी, लेकिन बार-बार जागने और फिर सोने से शरीर की प्राकृतिक नींद प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

नींद बार-बार टूटने से बढ़ सकती है सुस्ती

जब आप अलार्म बंद करके दोबारा सोते हैं, तो आपका शरीर फिर से नींद की अवस्था में जाने लगता है। कुछ ही मिनट बाद अलार्म बजने से नींद दोबारा टूट जाती है। इस तरह बार-बार नींद टूटने से सुबह उठने के बाद भारीपन और सुस्ती महसूस हो सकती है।इसे स्लीप इनर्शिया (Sleep Inertia) कहा जाता है। इसमें व्यक्ति जागने के बाद भी कुछ समय तक पूरी तरह सतर्क महसूस नहीं करता। उसे बिस्तर छोड़ने, काम शुरू करने या ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है।

नींद की प्राकृतिक प्रक्रिया हो सकती है प्रभावित

हमारी नींद कई अलग-अलग अवस्थाओं से होकर गुजरती है। रात में शरीर इन अवस्थाओं के बीच स्वाभाविक रूप से बदलाव करता है। लेकिन सुबह बार-बार अलार्म बजने और दोबारा सोने से यह प्रक्रिया बाधित हो सकती है।
स्नूज अलार्म का इस्तेमाल करने वाले लोगों की नींद में अधिक बदलाव और जागने के बाद सुस्ती देखी गई। हालांकि, इस विषय पर अधिक शोध की जरूरत है और हर व्यक्ति पर इसका प्रभाव एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है।

सुबह की ऊर्जा और एकाग्रता पर पड़ सकता है असर

अगर आप रोजाना कई बार अलार्म बंद करके सोते हैं, तो सुबह उठने के बाद तरोताजा महसूस करने के बजाय थकान बनी रह सकती है। इससे सुबह के जरूरी कामों में मन लगाने में परेशानी हो सकती है।कुछ लोगों को ऑफिस, पढ़ाई या अन्य गतिविधियां शुरू करने में भी अधिक समय लगता है। हालांकि, इसका संबंध केवल स्नूज अलार्म से नहीं, बल्कि कुल नींद की अवधि और उसकी गुणवत्ता से भी हो सकता है।

देर से उठने की आदत बन सकती है

बार-बार अलार्म स्नूज करने से सुबह की दिनचर्या प्रभावित हो सकती है। पांच मिनट की अतिरिक्त नींद कई बार 20 से 30 मिनट तक बढ़ जाती है। इससे नाश्ता, व्यायाम या अन्य जरूरी कामों के लिए समय कम बचता है।अगर आप रोजाना देर से उठते हैं, तो पूरे दिन की दिनचर्या बिगड़ सकती है।

बार-बार अलार्म स्नूज करने की आदत कैसे छोड़ें?

सोने का समय तय करें-रोजाना एक निश्चित समय पर सोने और जागने की कोशिश करें। इससे शरीर की प्राकृतिक बॉडी क्लॉक को नियमित रखने में मदद मिलती है।

पर्याप्त नींद लें-वयस्कों को सामान्यतः रात में 7 से 9 घंटे की नींद की जरूरत होती है। अपनी जरूरत के अनुसार सोने का समय तय करें।

अलार्म बिस्तर से दूर रखें-मोबाइल या अलार्म घड़ी को इतनी दूरी पर रखें कि उसे बंद करने के लिए आपको बिस्तर से उठना पड़े।

सुबह प्राकृतिक रोशनी लें-उठने के बाद पर्दे खोलें या कुछ समय प्राकृतिक रोशनी में बिताएं। इससे शरीर को जागने का संकेत मिलता है।

रात में मोबाइल का इस्तेमाल कम करें-सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें और शांत वातावरण में सोने की कोशिश करें।

कब समझें कि नींद की समस्या गंभीर है?

अगर पर्याप्त समय सोने के बाद भी सुबह उठने में बहुत परेशानी होती है, दिनभर अत्यधिक नींद आती है या लगातार थकान महसूस होती है, तो इसे केवल आलस समझकर नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।
सुबह पांच मिनट और सोने की आदत हर व्यक्ति के लिए गंभीर नुकसान का कारण बने, ऐसा जरूरी नहीं है। लेकिन बार-बार अलार्म बंद करके सोने से नींद टूट सकती है और जागने के बाद सुस्ती महसूस हो सकती है। इसलिए बेहतर है कि रात में पर्याप्त नींद लें और सुबह एक निश्चित समय पर उठने की आदत डालें।