Business Desk- Crude Oil Price : अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर गतिरोध बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की शर्तों को मानने से इनकार कर दिया है। इसके बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी है। गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 को सुबह 9.50 बजे तक ब्रेंट क्रूड 1.09% गिरकर 96.962 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 1.29% गिरकर 89.256 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

Oil Price क्यों गिर रहा है?
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की बड़ी वजह सप्लाई में सुधार है। सऊदी अरब ने अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन से तेल की सप्लाई बहाल कर दी है। फिलहाल यह आधी क्षमता पर शुरू हुई है, लेकिन इससे तेल की सप्लाई युद्ध से पहले के स्तर के करीब पहुंच रही है।
वहीं Strait of Hormuz से तेल की सप्लाई बढ़कर 13.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन हो गई है। सप्लाई बढ़ने से बाजार में तत्काल कमी की चिंता कम हुई है और क्रूड पर दबाव बना है।
US-Iran Talks में अभी भी गतिरोध
तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच स्थिति साफ नहीं हुई है। ईरान ने कतर के जरिए अमेरिका को 7 शर्तों वाला प्रस्ताव भेजा था। इसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मूज को खोलने समेत कई मांगें रखी गई थीं।
ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी शर्तें नहीं मानता, तब तक जलमार्गों पर नाकाबंदी जारी रहेगी। दूसरी ओर, तेहरान को अमेरिका की तरफ से भी स्ट्रेट ऑफ होर्मूज खोलने की शर्तों वाला प्रस्ताव मिला है।
Oil Importing Countries की बढ़ी चिंता
बड़े तेल आयातक देशों के लिए सिर्फ कीमत बढ़ना ही चिंता नहीं है, बल्कि Supply Crisis भी बड़ा मुद्दा है। फिलहाल सप्लाई में सुधार से क्रूड सस्ता हुआ है, लेकिन अमेरिका-ईरान तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
अगर दोनों देशों के बीच फिर तनाव बढ़ता है या युद्ध की स्थिति बनती है तो Geopolitical Risk बढ़ सकता है और कच्चे तेल की कीमतों पर दोबारा दबाव देखने को मिल सकता है। इसलिए बाजार की नजर अब अमेरिका-ईरान वार्ता और स्ट्रेट ऑफ होर्मूज से तेल की सप्लाई पर बनी हुई है।

