Crude Oil Price Today: बुधवार, 28 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड बढ़कर करीब 115.36 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 101.12 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। ये आंकड़े बुधवार की शुरुआती बाजार रिपोर्ट के हैं; कारोबार के दौरान कीमतों में बदलाव हो सकता है।
सऊदी अरब की रिफाइनरी पर हमले के दावे का असर
तेल की कीमतों में तेजी की एक बड़ी वजह सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी पर हमले का दावा है। यमन के हूती समूह ने मंगलवार को कहा था कि उसने मिसाइल से रिफाइनरी को निशाना बनाया। इस रिफाइनरी की क्षमता रोजाना 5.5 लाख बैरल तेल प्रोसेस करने की है।
हालांकि, शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक सऊदी अधिकारियों ने उस समय हमले की पुष्टि नहीं की थी। इसलिए इसे पुष्ट घटना के बजाय हमले के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका रहती है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर पड़ सकता है।
एक दिन पहले गिर गए थे कच्चे तेल के भाव
इससे पहले मंगलवार को कूटनीतिक बातचीत से सप्लाई को लेकर चिंताएं कुछ कम हुई थीं। इसके बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 1.93 डॉलर गिरकर 113.88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई थी। अमेरिकी WTI क्रूड भी करीब 1.86 डॉलर गिरकर 99.90 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था।
बुधवार को कीमतों में आई तेजी बताती है कि बाजार पश्चिम एशिया से जुड़ी खबरों पर संवेदनशील बना हुआ है। आने वाले दिनों में तेल की कीमतों की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि क्षेत्र में तनाव कितना बढ़ता है और सप्लाई पर वास्तविक असर पड़ता है या नहीं।

क्या भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होगा?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने से भारत के लिए तेल आयात की लागत बढ़ सकती है। इसका असर रुपये की डॉलर के मुकाबले कीमत, तेल कंपनियों की लागत और महंगाई पर भी पड़ सकता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने का मतलब यह नहीं है कि भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत बढ़ जाएंगे।
घरेलू ईंधन की कीमतों पर फैसला कई बातों पर निर्भर करता है। इसलिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव को लेकर फिलहाल किसी निश्चित नतीजे पर पहुंचना सही नहीं होगा।
आगे कच्चे तेल की कीमतों पर किन बातों का असर रहेगा?
बाजार की नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, तेल की सप्लाई में संभावित रुकावट, अमेरिकी कच्चे तेल के भंडार और उत्पादक देशों के फैसलों पर रहेगी। OPEC+ की प्रस्तावित बैठक में उत्पादन लक्ष्य को लेकर होने वाले फैसले भी कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।

