Business Desk : Crude Oil Price Today: अंतरराष्ट्रीय बाजार में गुरुवार, 29 अक्टूबर को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। Brent क्रूड करीब 114.10 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी WTI क्रूड करीब 101.45 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की संभावनाओं से तेल की आपूर्ति बाधित होने की आशंका कुछ कम हुई है। हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, Brent क्रूड करीब 1.1% गिरा, जबकि अमेरिकी WTI की कीमत में लगभग 1.3% की कमी आई। ये रिपोर्ट में दर्ज कारोबारी स्तर हैं। कच्चे तेल की कीमतें कारोबार के दौरान लगातार बदलती रहती हैं।

अमेरिका-ईरान वार्ता का तेल की कीमतों पर असर

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत को एक अहम वजह माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, मध्यस्थों के जरिए संघर्ष खत्म करने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इससे बाजार में तेल की सप्लाई को लेकर बनी चिंताओं को कुछ राहत मिली।

हालांकि, पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव और तेल आपूर्ति बाधित होने का जोखिम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अगर तनाव बढ़ता है या तेल की सप्लाई प्रभावित होती है, तो कीमतों में फिर तेजी आ सकती है। इसके उलट, बातचीत आगे बढ़ने और आपूर्ति संबंधी चिंताएं कम होने पर तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।

भारत में पेट्रोल-डीजल पर क्या होगा असर?

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने या घटने का असर देश के आयात बिल और अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।

कच्चा तेल महंगा होने से भारत की तेल आयात लागत बढ़ सकती है। इससे महंगाई और परिवहन लागत पर दबाव पड़ने का जोखिम रहता है। वहीं, कीमतों में लगातार गिरावट से आयात खर्च को राहत मिल सकती है।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत घटने का मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत कम हो जाएंगे। घरेलू कीमतों पर रुपये और डॉलर की विनिमय दर, टैक्स, तेल कंपनियों की लागत और मूल्य निर्धारण जैसे कई कारकों का असर पड़ता है।

आगे किस बात पर रहेगी नजर?

फिलहाल तेल बाजार की नजर अमेरिका-ईरान बातचीत, पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और वैश्विक तेल आपूर्ति पर बनी रहेगी। इन घटनाओं से तय होगा कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आगे जारी रहती है या बाजार में फिर तेजी आती है।

निवेशकों और तेल बाजार से जुड़े कारोबारियों के लिए आने वाले दिनों में सप्लाई से जुड़े संकेत अहम रहेंगे। भारत में भी कच्चे तेल की कीमतों के साथ रुपये की चाल और घरेलू ईंधन कीमतों पर नजर रखना जरूरी होगा।