Business Desk – Crude Oil Price Today : ईरान और कतर के बीच लगातार तीसरे दिन बातचीत से युद्ध खत्म होने की उम्मीद बढ़ी है। इससे सप्लाई बाधित होने की आशंका कुछ कम हुई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई। हालांकि, मिडिल ईस्ट में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों पर हमलों के कारण बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट और WTI की कीमत गिरी

सोमवार, 2 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। रॉयटर्स के मुताबिक, सुबह 9:37 बजे (भारतीय समय) तक ब्रेंट क्रूड 3.2% से ज्यादा गिरकर 109.75 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 3.3% से ज्यादा टूटकर 100.69 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

इससे पहले शुरुआती कारोबार में ब्रेंट 111.84 डॉलर और WTI 102.56 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहे थे। यानी कारोबार के दौरान दोनों बेंचमार्क में गिरावट और बढ़ी।

ईरान-कतर की बातचीत से क्यों गिरे दाम?

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की बड़ी वजह ईरान और कतर के अधिकारियों के बीच जारी बातचीत है। दोनों देशों के अधिकारी अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध को खत्म करने के लिए लगातार तीसरे दिन चर्चा कर रहे हैं।

बाजार को उम्मीद है कि बातचीत से तनाव कम हो सकता है और तेल की सप्लाई पर पड़ने वाला असर घट सकता है। इसी उम्मीद से पिछले सप्ताह की तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की। पिछले सप्ताह ब्रेंट क्रूड छह महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया था।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर अब भी बाजार की नजर

कीमतों में गिरावट के बावजूद तेल की सप्लाई को लेकर चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर हमलों ने वैश्विक ऊर्जा सप्लाई और शिपिंग लागत को लेकर चिंता बढ़ाई है।

यह समुद्री रास्ता दुनिया के तेल कारोबार के लिए अहम है। यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। अमेरिका में मंगलवार को होने वाले मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान को लेकर तनाव बढ़ने की आशंका भी बाजार के लिए जोखिम बनी हुई है।

OPEC+ ने दिसंबर का उत्पादन लक्ष्य नहीं बदला

इस बीच OPEC+ देशों ने दिसंबर के लिए कच्चे तेल का उत्पादन लक्ष्य पहले जैसा ही रखने का फैसला किया है। बाजार की उम्मीदों के मुताबिक लिए गए इस फैसले से फिलहाल उत्पादन नीति में किसी बड़े बदलाव का संकेत नहीं मिला है।

कच्चे तेल की कीमतों पर अब ईरान-कतर की बातचीत, होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा की स्थिति और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव का असर बना रहेगा।