Business Desk – Crude Oil Price Today : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब Global Oil Market पर साफ दिखाई दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।

10 सितंबर 2026, गुरुवार सुबह 6.20 बजे तक Brent Crude का भाव 101.360 डॉलर प्रति बैरल और WTI Crude 96.686 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। पिछले एक महीने में कच्चे तेल में करीब 14 से 16% की तेजी आई है। ऐसे में भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
फिलहाल घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में crude oil की कीमतें लंबे समय तक इसी तरह ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत में भी ईंधन महंगा होने का दबाव बढ़ सकता है। इसका असर सिर्फ वाहन चलाने की लागत तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रोजमर्रा की चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
Middle East Tension से क्यों बढ़ रहा Crude Oil?
कच्चे तेल की कीमतों में इस तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। दोनों देशों के बीच संघर्ष बढ़ने से Oil Supply Disruption का खतरा पैदा हुआ है। ईरान ने वॉशिंगटन को चेतावनी दी है कि अगर उसके क्षेत्र पर हमले जारी रहे तो वह अपनी कार्रवाई और बढ़ा सकता है।
दूसरी ओर अमेरिका की ओर से की जा रही नाकाबंदी का ईरान लगातार विरोध कर रहा है। इससे बाजार में यह डर बढ़ गया है कि पश्चिम एशिया से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। सऊदी अरब पर ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमलों ने भी क्षेत्रीय तनाव बढ़ा दिया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दावा है कि युद्ध नवंबर 2026 तक समाप्त हो जाएगा। अगर तनाव जल्द खत्म होता है तो Supply Pressure कम हो सकता है और तेल की कीमतों में भी राहत आ सकती है। लेकिन संघर्ष लंबा खिंचने पर कीमतों में और तेजी की आशंका बनी हुई है।
भारत में पेट्रोल-डीजल अभी महंगे होंगे?
अभी इसका सीधा जवाब नहीं है। 10 सितंबर को भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों में बदलाव नहीं हुआ है। नई दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपए और डीजल 95.20 रुपए प्रति लीटर है। मुंबई में पेट्रोल 111.21 रुपए और डीजल 97.83 रुपए, जबकि कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपए और डीजल 99.82 रुपए प्रति लीटर है। चेन्नई में पेट्रोल 107.78 रुपए और डीजल 99.56 रुपए प्रति लीटर है। यानी अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने के बावजूद फिलहाल इसका पूरा असर भारतीय ग्राहकों पर नहीं आया है। सरकारी तेल कंपनियां घरेलू कीमतों में बदलाव से पहले कई आर्थिक और बाजार परिस्थितियों को ध्यान में रखती हैं।
लंबे समय तक महंगा रहा Crude तो क्या होगा?
अगर Brent Crude लंबे समय तक 100 डॉलर के ऊपर बना रहता है, तो भारत के लिए मुश्किल बढ़ सकती है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में crude महंगा होने पर देश का Import Bill बढ़ता है। इसके अलावा अगर इसी दौरान रुपए की कीमत डॉलर के मुकाबले कमजोर होती है तो कच्चे तेल का आयात और महंगा हो सकता है। ऐसी स्थिति में तेल कंपनियों की लागत बढ़ेगी और पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ाने का दबाव बन सकता है।
पेट्रोल-डीजल महंगा हुआ तो क्या असर पड़ेगा?
ईंधन महंगा होने का असर सबसे पहले ट्रांसपोर्ट पर पड़ता है। डीजल की कीमत बढ़ने से माल ढुलाई और परिवहन लागत बढ़ सकती है। इसका असर फल-सब्जियों, अनाज और दूसरी रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। इसके अलावा पेट्रोलियम से जुड़े Plastic, Paint और Chemical Products की लागत भी प्रभावित हो सकती है। यानी लंबे समय तक पेट्रोल-डीजल महंगा रहा तो इसका असर सीधे घर के बजट पर पड़ सकता है।
अभी क्या समझें?
फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर हैं और सरकार की ओर से तत्काल कीमत बढ़ाने का कोई संकेत नहीं दिया गया है। लेकिन Brent Crude का 100 डॉलर के पार जाना चिंता बढ़ाने वाला है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि अमेरिका-ईरान तनाव कितने समय तक चलता है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में crude oil किस स्तर पर टिकता है। अगर तेल की तेजी लंबे समय तक जारी रहती है, तभी भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होने का दबाव ज्यादा बढ़ सकता है।



