Business Desk- Crude Oil Price Today : कच्चे तेल की कीमतों में 2 अक्टूबर 2026 को तेजी का दौर जारी है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड 4.4% उछलकर 102.31 डॉलर प्रति बैरल और WTI 2.7% बढ़कर 92.87 डॉलर पर बंद हुआ।

शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में भी तेल 102 डॉलर के आसपास बना रहा। इस तेजी के पीछे अमेरिका का मिडिल ईस्ट में तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भेजना और ईरान के साथ तनाव बढ़ने की आशंका अहम वजह है।
अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में बढ़ाई सैन्य मौजूदगी
अमेरिका मिडिल ईस्ट में तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भेज रहा है। इसके साथ करीब 9,000-10,000 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की खबर है। USS Theodore Roosevelt और USS Makin Island से जुड़ी सैन्य टुकड़ियों के नवंबर के अंत तक क्षेत्र में पहुंचने की उम्मीद है।
इस सैन्य तैनाती के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान के साथ समझौता नहीं होता तो नवंबर के मध्यावधि चुनाव के बाद सैन्य कार्रवाई फिर शुरू करने का विकल्प मौजूद है। इससे बाजार में संभावित सप्लाई बाधित होने का जोखिम बढ़ा है।
तेल सप्लाई सामान्य होने के बावजूद चिंता क्यों?
मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई में कुछ सुधार के संकेत हैं। सऊदी अरब का एक्सपोर्ट आउटलुक सुधरा है और खाड़ी क्षेत्र से शिपमेंट भी धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं। इसके बावजूद बाजार भू-राजनीतिक जोखिम को कीमतों में शामिल कर रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मूज से जुड़ी स्थिति खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का तेल इस रास्ते से गुजरता है।
भारत पर क्या होगा असर?
अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है और इससे तेल की सप्लाई प्रभावित होती है तो कच्चे तेल की कीमतों पर फिर दबाव बढ़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है, इसलिए लंबे समय तक ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों का असर देश के Import Bill और ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है।
हालांकि अभी यह तय नहीं है कि तनाव आगे किस दिशा में जाएगा। अगर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत से स्थिति सामान्य होती है और सप्लाई बाधित नहीं होती, तो तेल की कीमतों पर बना Geopolitical Risk Premium भी कम हो सकता है। दूसरी ओर सैन्य तनाव बढ़ने पर कीमतों में और उतार-चढ़ाव संभव है।
अभी तेल के भाव पर किन बातों की नजर?
फिलहाल बाजार की नजर तीन बड़े संकेतों पर है—अमेरिका की मिडिल ईस्ट में सैन्य तैनाती, स्ट्रेट ऑफ होर्मूज से तेल की आवाजाही और अमेरिका-ईरान बातचीत। इसके अलावा चीन के ईंधन निर्यात पर रोक और वैश्विक Diesel Supply की स्थिति भी तेल बाजार को प्रभावित कर रही है।

