कानपुर में 5600 करोड़ रुपये के अवैध लेनदेन और साइबर ठगी के मामले की जांच में शाहजेब वारिस मुख्य सूत्रधार के रूप में सामने आया है. पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और अन्य सहयोगियों की तलाश जारी है.
कानपुर. 5600 करोड़ रुपये के अवैध लेनदेन और साइबर ठगी के मामले की जांच में पुलिस को कई अहम जानकारियां मिली हैं. कानपुर कमिश्नरेट पुलिस के मुताबिक, बेकनगंज के तलाक महल निवासी शाहजेब वारिस इस नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार बनकर सामने आया है. पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश में क्राइम ब्रांच और एसओजी की टीमें दबिश दे रही हैं.
बैंक कर्मी की भूमिका
संयुक्त पुलिस आयुक्त संकल्प शर्मा के अनुसार, जांच में कई लोगों के नाम सामने आए हैं. इनमें एक बैंक कर्मी भी शामिल है, जिसकी भूमिका की पुलिस विस्तृत जांच कर रही है. जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई और गिरफ्तारियां की जाएंगी.
पुलिस ने इस मामले में 65 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं. इस रकम के साथ मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच के लिए विशेष टीम लगाई गई है. जांच के दौरान करीब 20 से 22 मर्चेंट खातों की जानकारी भी सामने आई है, जिनकी पड़ताल की जा रही है.
बैंकों से सहयोग का सवाल
संयुक्त पुलिस आयुक्त ने बताया कि संबंधित बैंक प्रबंधन को सिंडिकेट के बारे में जानकारी दिए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई. पुलिस द्वारा खाते सीज करने और जरूरी दस्तावेज मांगे जाने पर भी टालमटोल किए जाने की बात सामने आई है.
पुलिस अब संबंधित बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करेगी. अधिकारियों की जिम्मेदारी और पूरे मामले में उनकी भूमिका के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी.
वकीलों के सिंडिकेट की जांच
जांच में इस गिरोह को वकीलों के एक बड़े सिंडिकेट से संरक्षण मिलने की बात भी सामने आई है. पुलिस के मुताबिक, दिल्ली, मुंबई या गुजरात में दबिश के दौरान आरोपियों को कानूनी मदद देने के लिए ये वकील तुरंत पहुंच जाते थे.
होटल की नौकरी से शुरुआत
पुलिस जांच के मुताबिक, शाहजेब वारिस ने वर्ष 2018-19 में कानपुर के एक होटल में करीब 15 हजार रुपये महीने की नौकरी की थी. इसके बाद वह एक सीए के संपर्क में आया, जहां से उसने फर्जी आईटीसी क्लेम से जुड़े नेटवर्क के बारे में जानकारी हासिल की.
वर्ष 2022 में शाहजेब ने 12 युवकों का गैंग तैयार किया. इसके बाद लोगों के बैंक खाते किराए पर लेकर उनमें ऑनलाइन गेमिंग और साइबर फ्रॉड से जुड़ी रकम मंगाई जाने लगी.
पुलिस के अनुसार, इसी नेटवर्क से हुई काली कमाई के जरिए शाहजेब ने कई संपत्तियां बनाई. अब पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, बैंक खातों, नकद रकम और संपत्तियों समेत पूरे नेटवर्क की कड़ियों की जांच कर रही है.



