देहरादून. पीए के घर पड़े छापे को लेकर एक बार फिर पूर्व सीएम हरीश रावत का बयान सामने आय़ा है. उन्होंने बिना नाम लिए अपने विरोधियों को खुली चुनौती दी है. उन्होंने कहा कि ये जो हालात हैं, ये सब तो सुधर जाएंगे. मगर इस दौर में कई लोग अपनी भी नज़रों से गिर जाएंगे. चंदन जीना के घर पर ईडी का छापा! चंदन जीना सरकार के एक छोटे से पुर्जे थे और हमारी सरकार का एक घोषित निर्णय था कि पब्लिक सर्विस कमिशन, अधीनस्थ सेवा चयन आयोग और भर्ती बोर्डों से कोई और व्यक्ति नहीं, बल्कि यदि कभी संपर्क की आवश्यकता पड़ती है, कोई मीटिंग इत्यादि आयोजित होनी है, तो वह या तो मुख्यमंत्री के स्तर पर हो या मुख्य सचिव के स्तर पर हो और ज्यादातर मामलों में हमने उनसे कहा था कि सरकार की तरफ से कोई बात कही जानी होगी, कोई सुझाव दिया जाना होगा या कोई आपकी समस्या होगी, तो उसके लिए आप प्रमुख सचिव पर्सनल डिपार्मेंट से संपर्क रखें यह वह संपर्क करेंगे.

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आगे हरीश रावत ने कहा कि हमने इन संस्थाओं की स्वायत्तता का हमेशा सम्मान किया. मैं ईडी, सीबीआई सहित सारी इन्वेस्टिगेटिंग एजेंसियों को आमंत्रण देता हूं. मैं तीन साल उत्तराखंड का मुख्यमंत्री रहा, मेहरबानी करके मेरे पूरे कार्यकाल को टटोला जाए. मुझे ज्ञात है कि पहले भी दो बार मेरी सरकार के समय के कई फैसलों की फाइलों को टटोला गया है. मैं चाहता हूं, एक बार फिर उसको टटोल लीजिए और मेरे तथाकथित छिपे खजाने को ढूंढने के लिए जहां छापा मारना है, वहां छापा मारिए. मेरे कार्यकाल के दौरान जो स्टिंग हुआ और राष्ट्रपति शासन लागू करने की स्थिति बनी उसकी भी गहराई से जांच करिए. जिन भी नेतागणों, चाहे वह राष्ट्रीय स्तर के थे या प्रांतीय स्तर के थे, उनकी भी जांच करिए. मुझे यह बात इसलिए कहनी पड़ रही है, मैं तकनीकी रूप से तो मुख्यमंत्री तीन साल रहा और मगर एक साल तो राष्ट्रपति शासन ने गड़बड़ा दिया. फिर भी कई लोगों के पेट में मुझको देखकर मरोड़े उठते हैं.

आगे हरीश रावत ने कहा कि 10 साल से मैं सत्ता से बाहर हूं, अब भी उनके मरोड़े शांत नहीं हुए हैं और उन्हें परेशान करते हैं. कभी स्टिंगगर, कभी स्टीकर, कभी सर्वर, सब अपने-अपने तरीके से हरीश रावत पर प्रहार करते रहते हैं और स्वाभाविक है, लोकतंत्र के अंदर जब तक हम जिंदा हैं, तो लोग प्रहार करेंगे. कुछ स्वस्थ तरीके से प्रहार करते हैं, कुछ अस्वस्थ तरीके से प्रहार करते हैं. कुछ खुलकर सामने प्रहार करते हैं, कुछ कानाफूसी और दुष्प्रचार के माध्यम से प्रहार करते हैं, इसीलिए मैं आग्रह करना चाहता हूं कि कमीशन बनाकर मेरे तीन साल के कार्यकाल की जांच अवश्य कर लो.

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आगे हरीश रावत ने कहा कि चंदन जीना 1991 से मेरे साथ काम कर रहे हैं और मैं बड़े-बड़े पदों पर रहा. तनख्वाहें भी खूब अच्छी दीं, क्योंकि उस समय ज्यादा स्टाफ था नहीं. चंदन जीना 24 घंटे के कर्मचारी थे. कोई समय ऐसा नहीं रहा जब चंदन जीना को तनख्वाह न दी गई हो आज तक और वह निष्ठा के साथ, क्योंकि उनकी विनम्रता, उनकी शिष्टता, सहनशीलता और हर किसी को सम्मान देने का जो उनका गुण है, राजनीति में वह गुण मेरे लिए सहायक रहा है. मगर कुछ साथी मेरे ऐसे भी थे उनके हाथ में कुछ ताकत हो न हो, फूं-फा बहुत करते थे. चंदन सबसे हाथ जोड़कर के कहता था, ‘आइए, आइए बैठिए. इस समय जब मैं रुग्ण होकर अपने इलाज के लिए दिल्ली आया, तो थोड़ा-बहुत पैसा मैं घर चलाने के लिए क्योंकि स्टाफ तो पूरा है ही घर में, डिफेंस कॉलोनी का किराया भी देना है, बिजली का भी देना है.

आगे हरीश रावत ने कहा कि बीमारी के समय में कई लोगों से मैंने आग्रह करके संदेश भिजवाए, भई, कुछ पैसा पहुंचा दो ताकि मेरे घर का संचालन हो सके और मैं अपने दोस्तों को बताना चाहता हूं, बीमारी के दौरान जब मैं मेदांता के अंदर भर्ती था, यहीं पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, कहां-कहां से लोगों ने आकर मुझे इलाज के लिए खर्चा देकर के गए, जिस समय मैं मेदांता से अपने अस्थायी आवास पर आया, तो उस दिन मेरे पास 12 लाख रुपए थे और उसको अकाउंट आदि में समायोजित करने में समय लगता है. लोग हमारी मदद करते हैं, हमने लोगों की सेवा की, हमने लोग बनाए हैं. मेरी इतने वर्षों की राजनीति, इतने चुनाव लड़े… मेरे पास कभी कुछ नहीं रहा, लेकिन कभी कोई कमी भी नहीं रही. लोगों ने दिल खोलकर मेरी मदद की, क्योंकि हमने कभी किसी को राजनीतिक पद देने के लिए या किसी काम को करने के उपलक्ष्य में उनसे कोई सर्विस चार्ज के तौर पर पैसा नहीं लिया.

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आगे हरीश रावत ने कहा कि हमारे भगवान ने, हमारे ईष्ट देवता ने हमें जो अवसर दिया, हमने उसका उपयोग लोगों की मदद करने के लिए किया है. आज बहुत सारे चितकबरे लोग प्रचार कर रहे हैं कि यह हरीश रावत का पैसा है. क्या हरीश रावत इतने साल इतने बड़े-बड़े पदों पर रहा, क्या मेरे पास एक-दो करोड़ नहीं हो सकता? छोड़ दीजिए चंदन जीना की बात. इस बार भी मैंने 5 लाख से ऊपर का इनकम टैक्स भरा है.