कुंदन कुमार, पटना। बिहार की राजनीति में फरक्का बैराज और फरक्का संधि को लेकर सुगबुगाहट एक बार फिर तेज हो गई है। हाल ही में वैशाली जाने के क्रम में बिहार सरकार के मंत्री निशांत कुमार ने इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी पार्टी (JDU) का रुख बेहद बेबाकी से सबके सामने रखा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस संधि को लेकर उनकी पार्टी की नीति और विचारधारा पूरी तरह स्पष्ट है।

​जेडीयू की दो टूक: बिहार का हित सर्वोपरि

​मीडिया से बातचीत के दौरान मंत्री निशांत कुमार ने जोर देकर कहा कि जनता दल यूनाइटेड (JDU) का यह स्पष्ट मत है कि फरक्का संधि का नवीनीकरण नहीं होना चाहिए। हालांकि, यदि परिस्थितियों के कारण इस संधि का नवीनीकरण करना अनिवार्य भी हो जाता है, तो केंद्र सरकार और संबंधित पक्षों को यह सुनिश्चित करना होगा कि इसमें बिहार के हितों को हर हाल में सर्वोपरि रखा जाए। राज्य की जनता के अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

​बिहार के विकास पर पड़ता है गहरा असर

​निशांत कुमार ने इस बात पर विशेष प्रकाश डाला कि फरक्का संधि का सीधा और नकारात्मक प्रभाव बिहार के बुनियादी विकास पर पड़ता है। इससे राज्य का कृषि क्षेत्र, सिंचाई व्यवस्था, औद्योगिक प्रगति और आम जनता के लिए पेयजल की उपलब्धता सीधे तौर पर प्रभावित होती है। संधि के कारण उत्तर बिहार को गाद और बाढ़ जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था चरमरा जाती है।

​वैशाली बैठक से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज

​यह बयान ऐसे समय में आया है जब मंत्री निशांत कुमार वैशाली के लिए रवाना हो रहे थे। वहां पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा, प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक तय है। इस बैठक में आगामी चुनावी रणनीतियों के साथ-साथ फरक्का संधि जैसे राज्य से जुड़े बड़े मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हो सकती है। मंत्री के इस तीखे बयान ने एक बार फिर से इस राष्ट्रीय महत्व के क्षेत्रीय मुद्दे को केंद्र की राजनीति के पटल पर ला दिया है।