सत्या राजपूत, रायपुर। अर्नब चक्रवाती तूफान और भारी बारिश ने छत्तीसगढ़ के किसानों को एक बार फिर आर्थिक संकट में धकेल दिया है। पककर कटाई के लिए तैयार धान और सब्जियों की फसलें खेतों में गिरकर बर्बाद हो गई हैं। कई जगह फसलें पानी में डूब गई हैं और अब उनके सड़ने का खतरा मंडरा रहा है। प्रदेश में 75 प्रतिशत से अधिक रकबा प्रभावित होने की बात कही जा रही है। ऐसे में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के प्रदेश अध्यक्ष तेजराम विद्रोही और किसान नेता पारसनाथ साहू ने सरकार से तत्काल क्षतिपूर्ति, कर्जमाफी और विशेष राहत पैकेज देने की मांग की है।

पानी में डूबी फसलें सड़ने का खतरा, किसानों को तत्काल राहत देने की मांग

किसान नेता पारसनाथ साहू ने कहा कि अर्नब चक्रवात का असर साफ दिखाई दे रहा है। कई किसानों की फसलें पूरी तरह गिरकर बर्बाद हो गई हैं और अब वे कटाई के लायक भी नहीं बची हैं। पानी में डूबी फसलें सड़ जाएंगी। अभी तक मौसम साफ नहीं हुआ है और रेड व येलो अलर्ट जारी हैं। ऐसे में बची हुई फसल कब खराब हो जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता।

उन्होंने मांग की कि किसानों को सभी प्रकार की बीमा योजनाओं का पूरा लाभ मिलना चाहिए। किसानों को आर्थिक संकट से उबारने के लिए सरकार को सख्त कदम उठाने की जरूरत है। केंद्र सरकार से विशेष पैकेज की मांग कर राज्य सरकार को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।

पारसनाथ साहू ने याद दिलाया कि इससे पहले भी सर्वे कर क्षतिपूर्ति देने का वादा किया गया था। कुछ समय पहले नदियों में भयानक बाढ़ आई थी, खेत डूब गए थे और फसल को नुकसान हुआ था, लेकिन आज तक न सर्वे हुआ और न ही नुकसान की भरपाई हुई है।

भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष तेजराम विद्रोही ने कहा कि किसान संगठन लंबे समय से सरकार से मांग करता आया है कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए जोखिम फंड बनाया जाए। उन्होंने कहा कि किसान और प्रकृति एक-दूसरे से जुड़े हैं। कभी सूखा, कभी अल्प वर्षा, कभी अतिवृष्टि और अब अर्णब जैसे चक्रवात किसानों को बार-बार प्रभावित कर रहे हैं। खेती करना आसान नहीं है। किसानों के पूरे परिवार का भविष्य खेती पर टिका होता है और देश की अर्थव्यवस्था भी इस पर निर्भर करती है।

राजस्व और कृषि विभाग की टीमों से जल्द सर्वे कराने की मांग

तेजराम विद्रोही ने सरकार से मांग की कि फसल नुकसान के मूल्यांकन के लिए राजस्व विभाग, कृषि विभाग और बीमा कंपनी के अधिकारी-कर्मचारी अतिशीघ्र खेतों में जाएं और किसानों को राहत राशि प्रदान की जाए. साथ ही सभी किसानों का कर्ज माफ किया जाए, ताकि उन्हें आर्थिक और मानसिक संकट से उबारा जा सके। उन्होंने किसानों और उनके परिवारों से भी अनुरोध किया कि इस आपदा और संकट की घड़ी में परिवार एकजुट रहे, ताकि धैर्य के साथ गंभीर आर्थिक-मानसिक चुनौती का सामना किया जा सके।

अर्नब चक्रवात और लगातार बारिश ने छत्तीसगढ़ के किसानों को फिर याद दिला दिया है कि प्राकृतिक आपदाओं के सामने खेती कितनी असुरक्षित है। किसान संगठन अब सरकार से ठोस और त्वरित कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं। न सिर्फ सर्वे और मुआवजे की, बल्कि लंबे समय से लंबित जोखिम फंड और कर्जमाफी जैसी मांगों को पूरा करने की भी।

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