अभय मिश्रा, मऊगंज। मध्य प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना की शुरुआत इसलिए की थी कि पशुपालकों और किसानों की आय दोगुनी हो सके। लेकिन मऊगंज जिले में यह योजना भ्रष्ट अधिकारियों की भेंट चढ़ गई है। एक गरीब किसान अंगिरा प्रसाद पाण्डेय ने पत्नी के गहने गिरवी रखकर 1,47,500 जमा किए, ताकि दो दुधारू मुर्रा भैंस मिल सकें। लेकिन साल भर के संघर्ष के बाद जो मिला, उसने प्रशासनिक संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दीं।

8-10 लीटर दूध देने के वादे के बदले किसान को 1-2 लीटर दूध देने वाली बीमार भैंस और 10 इंच का एक ‘डमी बच्चा’ थमा दिया गया, जिस पर भैंस के बाल चिपकाकर पशु विभाग के अफसरों ने बाकायदा कान में टैगिंग भी कर दी। उधर, डिप्टी डायरेक्टर जे एल साकेत ने अपने सगे बेटे पुनीत कुमार साकेत का नाम सूची में सबसे ऊपर रखकर योजना का लाभ खुद डकार लिया।

योजना के नियमों के अनुसार सामान्य/पिछड़ा वर्ग के लिए 50% अनुदान (कुल इकाई लागत 2,95,000 में से हितग्राही अंशदान 1,47,500) तथा SC/ST वर्ग के लिए 75% अनुदान तय है। नियमों में 8 से 12 लीटर दूध देने वाली मुर्रा भैंस, पशु बीमा, परिवहन और भ्रमण व्यय शामिल हैं। चयन त्रिस्तरीय पंचायती राज के तहत मिल्क रूट के ग्रामों से और डीडी (Demand Draft) के माध्यम से होना था। लेकिन मऊगंज में ग्राम पंचायतों के प्रस्तावों को दरकिनार कर कागजों में जमकर धांधली की गई और अपात्रों को इसका लाभ दिया गया!

भ्रष्टाचार की इंतहा तब सामने आई जब चयनित हितग्राहियों की पहली सूची का पहला नाम पुनीत कुमार साकेत निकला, जो कि इसी पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर का सगा बेटा है! अफसरों ने अपने बेटे के नाम पर रातों-रात दो-दो दुधारू भैंसें आवंटित करवा लीं, जबकि असली गरीब किसान धक्के खाते रहे। और सालों पहले पैसा जमा करने के बाद भी आज कई किसानों को भैंस नहीं मिल पाई है वही भारी विरोध के बाद अंगीरा प्रसाद पांडे का नाम अगली सूची में जोड़ा गया।

जब विभाग की टीम हितग्राहियों को हरियाणा के करनाल (कैथल रोड, गली नंबर 3, नरू संस हाउस – 538) लेकर पहुँची, तो वहाँ किसानों को एक मकान में बंद कर बंधक बना लिया गया। पीड़ित किसान अंगीरा प्रसाद पाण्डेय ने कैमरे के सामने और खुद ब्लॉक वेटरिनरी ऑफिसर के. के. गुप्ता ने दूरभाष पर इसकी पुष्टि की है। अधिकारी को भी आईडी दिखाने के बाद ही छोड़ा गया। किसानों के आरोपों के मुताबिक बंधक बनाकर किसानों को जबरन बीमार भैंसें व डमी बच्चा थमाया गया और विरोध करने पर धमकियां दी गईं।

हितग्राही रामरतन साकेत का मोबाइल नंबर बदलकर सूची में हेराफेरी की गई।वही महेश कोल के नाम पर आवेदन तरुण मिश्रा द्वारा अधिकारियों की मिलीभगत से कराया गया। अंशदान का पैसा तरुण मिश्रा ने भरा और भैंस भी अपने घर ले गया।न्यूज 24 MP-CG और लल्लूराम डॉट कॉम की पड़ताल में पता चला कि महेश कोल नईगढ़ी में मजदूरी करता है। फोन पर महेश ने खुद पुष्टि की कि आवेदन और पैसे का इंतजाम तरुण मिश्रा ने किया था। आरोपों के मुताबिक 5 भैंसों के साथ डमी बच्चे दिए गए हैं, अधिकांश भैंसें 2-3 लीटर दूध देती हैं, और हितग्राहियों को जबरन फर्जी वीडियो बनवाकर यह कहलवाया गया कि भैंसें ठीक मिली हैं।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m