दिल्ली में सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को मुफ्त किताबें उपलब्ध कराने के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी (AAP) ने भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने किताबों की खरीद और छपाई की प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए सरकार पर कमीशनखोरी का दावा किया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।AAP की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद भी सरकारी स्कूलों में बच्चों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई गईं। उन्होंने किताबों की खरीद और छपाई की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए।

₹65 की किताब टेंडर के जरिए छपवाने पर उठाए सवाल

सौरभ भारद्वाज के दावे के मुताबिक, विद्यार्थियों को दी गई किताब NCERT की ‘मल्हार’ है, जो बाजार में करीब 65 रुपये में उपलब्ध है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यही किताब बाजार में इतनी कीमत पर उपलब्ध है, तो सरकार ने इसे टेंडर जारी कर छपवाने का फैसला क्यों किया। AAP ने इस प्रक्रिया को लेकर कथित अनियमितताओं की आशंका जताई है और सरकार पर कमीशन लेने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि किताबों की खरीद और छपाई में पारदर्शिता होनी चाहिए, ताकि सरकारी धन का इस्तेमाल विद्यार्थियों के हित में किया जा सके।

बाजार में 65 रुपये की किताब का दिया हवाला

सौरभ भारद्वाज का दावा है कि बाजार में ‘मल्हार’ किताब करीब 65 रुपये में उपलब्ध है। उनके मुताबिक, बाजार में मिलने वाली किताब की पेपर क्वालिटी बेहतर है और उसका प्रिंट साइज भी बड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि बाजार में किताब बेचने की कीमत में दुकानदार और डिस्ट्रीब्यूटर का कमीशन शामिल होने के बावजूद इसकी कीमत 65 रुपये है। AAP नेता ने सवाल उठाया कि जब बेहतर गुणवत्ता वाली किताब बाजार में इस कीमत पर उपलब्ध है, तो सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए छपवाई गई किताबों की गुणवत्ता ऐसी क्यों है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी खरीद और छपाई की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं।

80 GSM पेपर की शर्त, गुणवत्ता पर उठाए सवाल

भारद्वाज ने दावा किया कि कक्षा 8 की NCERT किताब ‘मल्हार’ के टेंडर में 80 GSM पेपर इस्तेमाल करने की शर्त रखी गई थी। इसके बावजूद, उनके आरोप के मुताबिक, सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को दी गई किताबों में अपेक्षाकृत घटिया कागज और बेहद छोटे आकार में छपी सामग्री मिली है। उन्होंने इस आधार पर छपाई की गुणवत्ता और टेंडर की शर्तों के पालन पर सवाल उठाए हैं। AAP का आरोप है कि विद्यार्थियों को मिलने वाली मुफ्त किताबों की गुणवत्ता और सरकारी खर्च के बीच पारदर्शिता होनी चाहिए।

शिक्षा मंत्री आशीष सूद और भाजपा सरकार पर आरोप

सौरभ भारद्वाज ने शिक्षा मंत्री आशीष सूद और दिल्ली की भाजपा सरकार पर किताबों की छपाई में 40 फीसदी कमीशन खाने का आरोप लगाया है। यह आरोप राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है। फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर कथित कमीशनखोरी को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए टेंडर की शर्तों, निर्धारित पेपर की गुणवत्ता, छपी हुई किताबों के नमूनों, प्रति किताब लागत और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच जरूरी है।

यमुना की सफाई में भी भ्रष्टाचार का आरोप

आम आदमी पार्टी (AAP) ने इससे पहले यमुना नदी की सफाई को लेकर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। पार्टी ने दावा किया था कि छठ पूजा से पहले कालिंदी कुंज बैराज पर यमुना से झाग हटाने का काम टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही एक निजी कंपनी को सौंप दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, छठ पूजा से पहले यमुना नदी को श्रद्धालुओं के स्नान के लिए उपयुक्त बनाने के उद्देश्य से कालिंदी कुंज बैराज पर झाग हटाने का काम शुरू किया गया था। हालांकि, इस काम को लेकर AAP ने दिल्ली सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।

सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली जल बोर्ड पर लगाए आरोप

AAP की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया था कि यमुना से झाग हटाने के काम के लिए जारी टेंडर की बोली प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही ठेकेदार मौके पर पहुंच गया था। उनके मुताबिक, दिल्ली जल बोर्ड (DJB) की टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही संबंधित ठेकेदार तंबू और उपकरणों के साथ काम शुरू करने की तैयारी में मौजूद था। भारद्वाज ने सवाल उठाया था कि जब टेंडर के लिए बोली प्रक्रिया शुरू नहीं हुई थी, तो ठेकेदार का चयन किस आधार पर किया गया। उन्होंने इस मामले को कथित अनियमितता बताते हुए दिल्ली सरकार से जवाब मांगा था।

PWD के बाद जल बोर्ड पर भी सवाल

सौरभ भारद्वाज ने दावा किया था कि आम आदमी पार्टी इससे पहले लोक निर्माण विभाग (PWD) में सड़क निर्माण को लेकर कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठा चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब दिल्ली जल बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। भारद्वाज के मुताबिक, PWD और दिल्ली जल बोर्ड दोनों विभाग प्रवेश वर्मा के अधीन हैं। उन्होंने इन विभागों में सरकारी कामकाज और ठेका प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे।

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