नई दिल्ली: दिल्ली की ऐतिहासिक विरासत, स्थापत्य कला और प्राकृतिक धरोहरों से लोगों को जोड़ने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) एक नई पहल शुरू करने जा रहा है। इसके तहत राजधानी के छह प्रमुख स्थलों पर हेरिटेज वॉक और नेचर वॉक आयोजित की जाएंगी। इस पहल के लिए DDA ने इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) के दिल्ली चैप्टर के साथ छह महीने का समझौता किया है।
योजना के तहत हर महीने दो वॉक आयोजित होंगी। इसकी शुरुआत शनिवार को शाम चार बजे महरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क से होगी। इन वॉक के दौरान प्रतिभागियों को दिल्ली की ऐतिहासिक इमारतों, स्थापत्य कला, सांस्कृतिक विरासत और उनसे जुड़ी कम चर्चित कहानियों को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।
LG के निर्देश पर शुरू हुई दिल्ली हेरिटेज वॉक पहल
यह पहल उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के निर्देश पर शुरू की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य दिल्ली की ऐतिहासिक धरोहरों और हरित क्षेत्रों के संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है।
हाल ही में उपराज्यपाल ने संजय वन में आयोजित हेरिटेज वॉक का नेतृत्व किया था। उन्होंने दिल्ली रिज की विरासत पर आधारित एक ई-बुक भी जारी की थी। इसके बाद उन्होंने DDA को ऐसी गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए, जिनसे लोग राजधानी की ऐतिहासिक धरोहरों और प्राकृतिक संपदा से जुड़ सकें।
दिल्ली के इन 6 स्थानों पर होंगी 12 हेरिटेज वॉक
छह महीने की इस योजना के तहत दिल्ली के छह प्रमुख स्थलों पर कुल 12 हेरिटेज और नेचर वॉक आयोजित की जाएंगी। इनमें शामिल हैं:
- महरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क: ऐतिहासिक स्मारकों और स्थापत्य कला की जानकारी।
- संजय वन: प्राकृतिक हरियाली और ऐतिहासिक विरासत का अनुभव।
- सुल्तान गढ़ी: दिल्ली की प्राचीन स्थापत्य विरासत से परिचय।
- तुगलकाबाद: ऐतिहासिक किले और मध्यकालीन इतिहास की जानकारी।
- डियर पार्क-हौज खास: प्राकृतिक परिवेश और ऐतिहासिक स्थलों की सैर।
- नॉर्दर्न रिज: दिल्ली की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत की झलक।
INTACH तैयार करेगा रूट, DDA संभालेगा व्यवस्थाएं
इस कार्यक्रम के तहत INTACH वॉक के रूट, विषय और ऐतिहासिक जानकारियां तैयार करेगा। साथ ही विरासत विशेषज्ञों और प्रशिक्षित गाइड की व्यवस्था भी की जाएगी। वहीं, DDA प्रतिभागियों के प्रवेश, आवश्यक अनुमतियों और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभालेगा।
इस पहल से दिल्लीवासियों को शहर के इतिहास और प्रकृति को नए नजरिए से जानने का मौका मिलेगा। साथ ही, विरासत संरक्षण के प्रति जनभागीदारी बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
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