नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) को स्टार पहलवान विनेश फोगाट को 9 मई और 17 जून को जारी किए गए कारण बताओ नोटिसों पर दो हफ्ते के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया है। जस्टिस अमित महाजन ने सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर असमंजस की स्थिति बने रहने से खिलाड़ी की तैयारी और उसके खेल प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ सकता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दो हफ्ते की अवधि के बाद महासंघ जो भी निर्णय लेगा, उसे अगली सुनवाई तक लागू नहीं किया जाएगा।
पहला नोटिस: 9 मई को जारी हुए थे चार गंभीर मामले
भारतीय कुश्ती महासंघ ने 9 मई को विनेश फोगाट को 15 पेज का विस्तृत कारण बताओ नोटिस जारी किया था, जिसमें मुख्य रूप से चार मामलों पर जवाब मांगा गया था:
- पेरिस ओलंपिक वजन विवाद: साल 2024 के पेरिस ओलंपिक में 50 किलो भारवर्ग के फाइनल मुकाबले से पहले वजन जांच के दौरान वजन तय सीमा से 100 ग्राम अधिक मिलने और अयोग्य घोषित किए जाने का मामला।
- डोप टेस्ट से जुड़ा मामला: WFI का आरोप था कि 18 दिसंबर 2025 को डोप टेस्ट के लिए पहुंची टीम को विनेश उपलब्ध नहीं मिली थीं (इसमें सितंबर 2024 की एक अन्य घटना का भी जिक्र था)।
- संन्यास से वापसी के नियम: विनेश द्वारा पेरिस ओलंपिक के बाद संन्यास की घोषणा और 12 दिसंबर 2025 को वापसी की जानकारी देने पर, महासंघ ने यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) के नियमों का हवाला दिया जिसके तहत संन्यास वापसी की सूचना कम से कम 6 महीने पहले देनी होती है।
- चयन ट्रायल नियम: मार्च 2024 में पटियाला में हुए चयन ट्रायल के दौरान विनेश द्वारा 50 और 53 किलो दोनों भारवर्गों में हिस्सा लेने को नियमों के खिलाफ बताया गया था। इस नोटिस के साथ महासंघ ने उन्हें 26 जून 2026 तक प्रतियोगिताओं में भाग लेने से अयोग्य घोषित किया था।
दूसरा नोटिस: 17 जून को अनुशासनहीनता का आरोप
WFI ने दूसरा कारण बताओ नोटिस 17 जून को जारी किया था। यह नोटिस 30 मई 2026 को दिल्ली में आयोजित एशियन गेम्स के चयन ट्रायल के दौरान उनके कथित व्यवहार और अनुशासनहीनता से संबंधित था। इस ट्रायल में विनेश ने 53 किलो भारवर्ग में हिस्सा लिया था और शुरुआती दो मुकाबले जीतने के बाद वे सेमीफाइनल में मीनाक्षी गोयत से 4-6 से हार गई थीं।
इसके बाद विनेश फोगाट ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चयन प्रक्रिया और ट्रायल के दौरान हुई घटनाओं पर सवाल उठाए थे। उन्होंने 30 जून को WFI के नोटिस का जवाब देते हुए आरोपों को अस्पष्ट बताया था। उनका कहना था कि नोटिस में कथित घटनाओं का पूरा विवरण नहीं दिया गया है और दूसरी पहलवानों से जुड़े मामलों में ऐसी अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाती। उन्होंने WFI की अनुशासन समिति के गठन और सदस्यों की जानकारी सार्वजनिक न करने पर भी सवाल खड़े किए थे। अब अदालत के निर्देश के बाद महासंघ को इस पर दो हफ्ते में निर्णय लेना होगा।
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