दिल्ली पुलिस (Delhi Police) और वकीलों के बीच चल रहे विवाद के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने ACP मनस्वी वशिष्ठ (ACP Manasvi Vashishth) को लेकर स्वतः संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट में इस मामले का जिक्र किया गया था। इस पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत इस मामले में खुद से संज्ञान नहीं लेगी। हालांकि, उन्होंने वकीलों को मामले में औपचारिक याचिका दाखिल करने की सलाह दी है।
हाईकोर्ट ने वकीलों को दिया आश्वासन
मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले का जिक्र किया गया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस नितिन वासुदेव सांब्रे ने मामले में स्वतः संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। हालांकि, उन्होंने वकीलों को आश्वासन दिया कि यदि इस मामले में औपचारिक याचिका दाखिल की जाती है तो अदालत उस पर विचार करेगी।
ACP मनस्वी वशिष्ठ को किया गया निलंबित
दरअसल, शाहदरा थाने में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच हुए विवाद के बाद ACP मनस्वी वशिष्ठ के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही थी। इस मामले को लेकर रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन ने वकीलों से न्यायिक कामकाज से दूर रहने की अपील की थी। बाद में दिल्ली पुलिस ने ACP मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया। इस कार्रवाई के बाद बार एसोसिएशन ने अपना फैसला वापस लेने का निर्णय लिया। ACP के निलंबन के बाद रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन ने काम बंद रखने का आह्वान वापस ले लिया है। इसके चलते वकील आज से अदालतों में अपने नियमित कामकाज पर लौटेंगे। इससे लंबित मामलों की सुनवाई और अन्य न्यायिक गतिविधियां फिर से सामान्य होने की उम्मीद है।
शाहदरा थाने से शुरू हुआ था विवाद
दरअसल, पूरा विवाद 23 अक्टूबर को पूर्वी दिल्ली के शाहदरा पुलिस थाने से शुरू हुआ था। यहां पुलिसकर्मियों और कड़कड़डूमा कोर्ट के वकीलों के बीच झड़प की घटना सामने आई थी। इस दौरान हुई मारपीट में एक वकील को चोटें भी आई थीं। वकीलों ने ACP मनस्वी वशिष्ठ पर कथित तौर पर धमकी भरी टिप्पणी करने और रिवॉल्वर दिखाकर धमकाने का आरोप लगाया था। इस घटना के बाद वकीलों में नाराजगी बढ़ गई और उन्होंने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी थी।
ACP और SHO का कर दिया गया था तबादला
मामला बढ़ने के बाद 28 अक्टूबर को पुलिस प्रशासन ने ACP मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के SHO का तबादला कर दिया था। इसके बाद वकीलों ने अपना धरना और हड़ताल समाप्त कर दी थी। हालांकि, इस कार्रवाई से दिल्ली पुलिस के एक वर्ग में नाराजगी फैल गई। ACP और SHO के तबादले के विरोध में 2 नवंबर को ACP मनस्वी वशिष्ठ समेत दर्जनों पुलिसकर्मी दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर पहुंच गए। यहां पुलिसकर्मियों ने एकजुट होकर अपनी नाराजगी जाहिर की और प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखीं। इस दौरान ACP वशिष्ठ ने पुलिसकर्मियों का नेतृत्व किया था।
विरोध प्रदर्शन के बाद ACP निलंबित
दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस प्रशासन ने ACP मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया। इस कार्रवाई के बाद रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन ने काम बंद रखने का अपना आह्वान वापस ले लिया। अब वकील आज से नियमित रूप से अदालतों में काम करेंगे। मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट में भी इस मामले का उल्लेख किया गया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस नितिन वासुदेव सांब्रे ने मामले में स्वतः संज्ञान लेने से इनकार कर दिया। हालांकि, उन्होंने वकीलों को आश्वासन दिया कि यदि इस संबंध में औपचारिक याचिका दाखिल की जाती है तो अदालत उस पर विचार करेगी।
पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन के बाद ACP मनस्वी वशिष्ठ सस्पेंड
दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन के अगले दिन यानी 3 नवंबर को ACP मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया गया। उन पर पुलिस मुख्यालय के बाहर धरना देने और विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने का आरोप है। जानकारी के मुताबिक, ACP मनस्वी वशिष्ठ के नेतृत्व में 2 नवंबर को 50 से अधिक पुलिसकर्मी दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर पहुंचे थे। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने अपने अधिकारियों के तबादले के खिलाफ नाराजगी जताई और अपनी मांगें रखीं। प्रदर्शन के दौरान ACP वशिष्ठ ने पुलिसकर्मियों का नेतृत्व किया था। इस विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस प्रशासन ने उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की। ACP के निलंबन के बाद रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी अपना काम बंद रखने का फैसला वापस ले लिया और वकीलों के काम पर लौटने का रास्ता साफ हो गया।
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