Delhi High Court Hearing Saurav Das & Ashutosh Ranka Plea: दिल्ली हाई कोर्ट में बुधवार को सौरभ दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। राहत की उम्मीद लेकर पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी नेताओं की हाईकोर्ट ने क्लास लगा ली। दिल्ली हाई कोर्ट सौरभ दास और आशुतोष रांका को नियमों के उल्लंघन पर खूब सुनाया। अदालत ने उम्र पूछने के बाद सौरव और आशुतोष को कगा कि आप जेन-जी (Gen-Z) नहीं हैं। साथ ही कोर्ट ने फ्रांस-इटली हिंसा का वीडियो दिखार दोनों सीजेपी नेताओं से तीखे सवाल पूछे। दिल्ली हाईकोर्ट से लताड़ लगने के बाद सौरव दास और आशुतोष रांका ने अपनी याचिका वापस ले ली।

बता दें कि बता दें कि प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के कारण दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। इसके बाद स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) ने 5 दिन की न्यायिक में भेज दिया था। बाद में 2 दिन और बढ़ा दिया था। स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के आदेश को सौरव दास और आशुतोष रांका ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान सौरव दास और आशुतोष रांका को ही फटकार लगा दी। साथ ही कई तीखे सवाल भी पूछे। कोर्ट ने कहा कि डीनोटिफिकेशन के बाद बिना अनुमति जंतर-मंतर जाने का मामला भी विचारणीय है। जबकि डीनोटिफिकेशन को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और उस पर कोई रोक नहीं लगी है। इसके बाद आप हाईकोर्ट क्यों आए हैं। कोर्ट ने इस दौरान दोनों की उम्र पूछी। जिस पर  सौरभ और आशुतोष के वकील अभिक चिमनी ने कहा कि आशुतोष की उम्र 31 साल है और सौरभ 27 साल के हैं। इसपर कोर्ट ने कहा कि आप लोग जेन-जी नहीं हैं। अदालत ने कहा कि यदि आप जोर दे रहे हैं तो बहस पर आइए। आपकी उम्र कितनी है?’ चिमनी ने कहा ‘सौरभ 27 साल के हैं और आशुतोष 32।’ इस पर अदालत ने कहा, ‘तब आप जेन जी नहीं हैं। जेन जी क्या है?’ अदालत को बताया गया कि 1997 के बाद जन्मे लोग जेन जी कहलाते हैं। अदालत ने फिर कहा तो तब आप जेन जी नहीं हैं।

अदालत ने कहा- हम देख रहे देश के बाहर क्या हो रहा है

अदालत ने सौरभ दास और आशुतोष रांका को पहले ही बंद किए जा चुके जंतर-मंतर जाने को लेकर फटकरा भी लगाया और विदेशों में हो रही हिंसक घटनाओं का जिक्र किया। अदालत ने कहा कि आपने बेल बॉन्ड दिया और इसके बाद फिर जंतर-मंतर गए जिसे पहले डीनोटिफाई किया जा चुका था। डिनोटिफाई करने का मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने लंबित है। नोटिफिकेशन पर स्टे नहीं लगा है, आप वहां जाते हैं और कदम उठाते हैं। गलत या सही, आप वहां गए। जब आप जाते हैं और बैरिकेड तोड़ते हैं, 10-20 और लोगों के जाकर धारा 164 तोड़ने की संभावना बहुत हो जाती है।

सवाल तो आप पर भी उठेंगे

सुनवाई के दौरान जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद ने कहा कि सवाल तो यह भी उठेगा न कि आपका संगठन क्या है और उसका मकसद क्या है?आप जुलाई में छात्रों के लिए प्रदर्शन कर रहे थे. अब आप किसी और मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे हैं. आगे किसी और मुद्दे पर करेंगे. तो यह सवाल तो उठेगा ही?

आजादी पवित्र है, उसकी मर्यादा रखिएः हाईकोर्ट

सुनवाई के दौरान आशुतोष और सौरभ दास के वकील ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने 19 अक्टूबर को यह नहीं बताया कि दोनों से क्या खतरा है? इस पर जज प्रसाद ने कहा कि आपने एक बॉन्ड तोड़ा, क्या यह पर्याप्त नहीं है? आजादी पवित्र है, लेकिन कुछ प्रावधान भी तो है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि आज मजिस्ट्रेट दोनों की न्यायिक हिरासत पर सुनवाई करेंगे।

जानें क्या है पूरा मामला

बता दें कि प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के कारण दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। सौरव और आशुतोष ने प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किए जा चुके जंतर-मंतर पर बिना अनुमति के घुसने और वहां विरोध-प्रदर्शन करने का प्रयास किया था। 14 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) में पेश किया गया था। कोर्ट ने सीजेपी के दोनों प्रक्ताओं को 5 दिनों की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया था। 5 दिन न्यायिक हिरासत खत्म होने के बाद दोनों को 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने दोनों को दो दिन की न्यायिक हिरासत में फिर भेज दिया है।

SIR पर चुनाव आयोग में फूट! 10 महीने में 14 बार दो चुनाव आयुक्तों ने फैसलों पर जताई नाराजगी, जानकारी के बिना निर्णय लेने का लगाया आरोप

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m