आत्मदाह की कोशिश मामले में गहराई सियासत, पूर्व CM रमन सिंह ने साधा भूपेश सरकार पर निशाना, पूछा- ‘ हरदेव की इस दशा को आपकी विफलता माने या सफलता?’

धमतरी के रहने वाले बेरोजगार युवक हरदेव सिन्हा ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास के सामने आग लगाकर खुदकुशी की कोशिश की, 40 फीसदी जली हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, इलाज जारी

रायपुर- मुख्यमंत्री निवास के सामने धमतरी के रहने वाले हरदेव सिन्हा के द्वारा आत्मदाह के प्रयास किए जाने की घटना पर पूर्व मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया है. उन्होंने ट्वीट के जरिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से पूछा है कि राज्य की जनता हरदेव की इस दशा को आपकी विफलता माने या सफलता? बता दें कि हरदेव सिन्हा ने सोमवार की दोपहर मुख्यमंत्री निवास के सामने आग लगाकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी. सुरक्षा में तैनात लोग तक आग बुझा पाते, वह चालीस फीसदी जल चुका था. फिलहाल उसका इलाज जारी है.

पूर्व मुख्यमंत्री डाक्टर रमन सिंह ने घटना के दूसरे दिन एक के बाद एक तीन ट्वीट कर सरकार पर तंज कसा. उन्होंने अपने दूसरे ट्वीट में कांग्रेस का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी को टैग करते हुए लिखा है कि-

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छत्तीसगढ़ आकर झूठे वादे करने वाले @RahulGandhi अब कहाँ हैं? आपके वादों पर विश्वास करने वाले युवाओं को विश्वासघात की आग में धकेलने वाले मुख्यमंत्री को क्या अब भी आप पद पर रहने देंगे?

वहीं अपने तीसरे ट्वीट में रमन सिंह ने अदम गोंडवी की कविता के जरिए सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने लिखा कि-

जिस्म क्या है रूह तक सब कुछ ख़ुलासा देखिये
आप भी इस भीड़ में घुस कर तमाशा देखिये जो बदल सकती है इस पुलिया के मौसम का मिजाज़ उस युवा पीढ़ी के चेहरे की हताशा देखिये। – अदम गोंडवी

हालांकि बीजेपी के इन सियासी बयानों के पहले मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बयान जारी अपील की थी कि किसी को भी भावावेश में आकर ऐसा नकारात्मक कदम नहीं उठाना चाहिए. उन्होंने कहा था कि हरदेव सिन्हा पिछले 2 साल से मानसिक रूप से अस्वस्थ है. पिता बुजुर्गं होने के कारण घर पर ही रहते हैं. हरदेव सिन्हा की गांव में दो एकड़ कृषि भूमि है और वह 9वीं तक पढ़ा है. हरदेव सिन्हा का रोजगार गारंटी में जॉब कार्ड है और पिछले माह उसने 11 दिन का काम भी किया है. उसके परिवार के लोगों ने 21 दिन काम किए हैं.

साल 2016 में जब सत्ता में रमन सरकार काबिज थी, उस दौरान योगेश साहू नाम के एक दिव्यांग ने भी मुख्यमंत्री निवास के सामने आग लगा ली थी. बाद में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी. दोनों घटनाओं में एक समानता थी कि बेरोजागारी से जूझते हुए युवा मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे थे.

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