रांची। धनबाद जिले में जापानी इंसेफ्लाइटिस (JE) के दो मामलों की पुष्टि और एक बच्चे की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में आ गया है। बीमारी की रोकथाम और स्थिति की निगरानी के लिए सोमवार को रांची से वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के स्टेट ट्रेनिंग कंसलटेंट के नेतृत्व में टीम धनबाद जाएगी। टीम संक्रमित मरीजों से जुड़े क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का जायजा लेगी और निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत आवश्यक कार्रवाई करेगी।

प्रभावित इलाकों में मच्छर और लार्वा नाशी दवाओं का छिड़काव

राज्य के वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के स्टेट नोडल पदाधिकारी डॉ. रंजीत प्रसाद ने बताया कि धनबाद में एक बच्चे की JE से मौत और एक अन्य बच्चे में संक्रमण की पुष्टि की जानकारी मिली है। इसके बाद अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने बताया कि रांची से स्वास्थ्य विभाग की टीम धनबाद जाकर प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करेगी। इन इलाकों में मच्छर और लार्वा नाशी दवाओं के छिड़काव के निर्देश दिए गए हैं। वहीं SNMMCH में इलाज करा रहे दूसरे संक्रमित बच्चे के स्वास्थ्य की भी जानकारी ली गई है। अधिकारियों के अनुसार, बच्चे की हालत में सुधार के संकेत हैं।

स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार कर रही निगरानी

डॉ. रंजीत प्रसाद ने बताया कि पूरे मामले पर स्वास्थ्य विभाग लगातार नजर बनाए हुए है। VBD, IDSP और धनबाद के सिविल सर्जन को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

क्या है जापानी इंसेफ्लाइटिस, कैसे पहचानें लक्षण?

IDSP रांची के डॉ. प्रवीण कर्ण ने बताया कि जापानी इंसेफ्लाइटिस को आम बोलचाल में मस्तिष्क ज्वर कहा जाता है। यह विषाणुजनित बीमारी है, जो संक्रमित मच्छर के काटने से फैलती है। यह बीमारी मस्तिष्क को प्रभावित कर सकती है और गंभीर स्थिति में जानलेवा भी हो सकती है।

इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, दौरे पड़ना, अत्यधिक सुस्ती, भ्रम और व्यवहार में बदलाव शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि बुखार को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर योग्य चिकित्सक से जांच और उपचार कराना जरूरी है।