प्रदीप मालवीय, उज्जैन। आज धनतेरस के अवसर पर उज्जैन के कुंडेश्वर महादेव मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। कोई अपने परिवार की खुशहाली तो कोई कारोबार में तरक्की और घर में धन-धान्य का भंडार भरा रहने की कामना लेकर यहां पहुंच रहा है। इस मंदिर में भगवान महादेव के साथ धन के देवता कुबेर की पूजा का भी विशेष महत्व है।
धनतेरस पर यहां एक खास परंपरा निभाई जा रही है। श्रद्धालु मंदिर में विराजित कुबेर देवता की प्रतिमा की नाभि में इत्र लगा रहे हैं। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख, शांति, वैभव और लक्ष्मी का वास होता है। कुबेर देवता को विशेष रूप से अनार का भोग भी लगाया जाता है। मंदिर में भगवान महादेव का पंचामृत अभिषेक और विशेष पूजन किया जा रहा है।
उज्जैन के 84 महादेव मंदिरों में शामिल कुंडेश्वर महादेव मंदिर अपनी कई अनोखी विशेषताओं के लिए भी जाना जाता है। यहां कुबेर देवता की करीब 1100 साल पुरानी प्रतिमा विराजित है। मंदिर की एक और खास बात यहां मौजूद नंदी की प्रतिमा है। यहां नंदी बैठे हुए नहीं, बल्कि खड़ी मुद्रा में विराजित हैं। इसे विश्व की अनोखी प्रतिमाओं में से एक बताया जाता है।
इसके अलावा मंदिर के शिखर पर भी एक विशेष धार्मिक संरचना देखने को मिलती है। आमतौर पर शिव मंदिरों के शिखर पर रुद्र यंत्र होता है, लेकिन कुंडेश्वर महादेव मंदिर के शिखर पर माता लक्ष्मी का श्री यंत्र बना हुआ है। इसी वजह से मंदिर का विशेष महत्व माना जाता है।
आज धनतेरस पर मंदिर में पहुंच रहे श्रद्धालु भगवान महादेव के दर्शन के साथ कुबेर देवता से भी अपने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना कर रहे हैं। आस्था और परंपरा का यह संगम कुंडेश्वर महादेव मंदिर को धनतेरस पर खास बना रहा है।
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