उत्तर प्रदेश के बरेली जिले की आंवला लोकसभा सीट से पूर्व भाजपा सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने पार्टी की प्राथमिक और सक्रिय सदस्यता छोड़ने का एलान किया है. उन्होंने संगठन में कथित भीतरघात करने वाले नेताओं को तरजीह मिलने और पिछड़े-अति पिछड़े समाज को उचित सम्मान नहीं मिलने पर नाराजगी जताई.

बरेली. जिले की आंवला लोकसभा सीट से पूर्व भाजपा सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने पार्टी की प्राथमिक और सक्रिय सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की है. सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने संदेश में उन्होंने संगठन के भीतर कथित भीतरघात करने वाले नेताओं को अहमियत दिए जाने और पिछड़े-अति पिछड़े समाज को अपेक्षित सम्मान नहीं मिलने पर असंतोष जाहिर किया.

इस्तीफे की बताई वजह

धर्मेंद्र कश्यप ने अपना त्यागपत्र भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष, ब्रज क्षेत्र अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष को संबोधित किया है. इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी के खिलाफ मतदान करने और संगठन को कमजोर करने वाले नेताओं को प्रमुख स्थान दिया गया, जबकि पिछड़े और अति पिछड़े समाज को संगठन में उचित प्रतिनिधित्व और सम्मान नहीं मिला.

उन्होंने इसी नाराजगी को इस्तीफे की वजह बताते हुए अपनी प्राथमिक और सक्रिय सदस्यता समाप्त करने का अनुरोध किया है. हालांकि, सोशल मीडिया पर की गई घोषणा के बाद पार्टी ने उनका इस्तीफा स्वीकार किया है या नहीं, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है.

ब्रज क्षेत्र अध्यक्ष से मुलाकात

इस घटनाक्रम के बीच भाजपा के ब्रज क्षेत्र अध्यक्ष पूरनलाल लोधी ने धर्मेंद्र कश्यप से मुलाकात की. लोधी ने इसे औपचारिक मुलाकात बताया, लेकिन दोनों के बीच हुई बातचीत का विवरण साझा नहीं किया.

उन्होंने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि मुलाकात के दौरान इस्तीफे को लेकर कोई चर्चा हुई थी या नहीं. ऐसे में यह जानकारी सामने नहीं आई है कि पार्टी नेतृत्व ने कश्यप की नाराजगी दूर करने या उन्हें मनाने के लिए कोई ठोस पहल की है.

पहले भी चर्चा में रहे

धर्मेंद्र कश्यप इससे पहले अपने ‘टाटा-बाय-बाय’ बयान को लेकर सुर्खियों में आए थे. अब पार्टी की सदस्यता छोड़ने के उनके एलान के बाद उत्तर प्रदेश में भाजपा के भीतर उनके राजनीतिक रुख को लेकर चर्चा तेज हो गई है.

नेतृत्व के रुख पर नजर

कश्यप की नाराजगी से संगठन में प्रतिनिधित्व और सामाजिक समीकरणों का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है. अब देखना होगा कि भाजपा नेतृत्व उनके इस्तीफे के एलान पर क्या निर्णय लेता है और उनकी शिकायतों के समाधान के लिए कोई औपचारिक कदम उठाया जाता है या नहीं.