अनुराग शर्मा, सीहोर। बारिश का मौसम सिर पर है, आसमान में कुछ दिन में काले बादल मंडराने लगेंगे, लेकिन सीहोर प्रशासनिक अमला गहरी नींद में सोया हुआ है। नगरीय क्षेत्र के सबसे व्यस्त और संवेदनशील इलाके तहसील चौराहा के पास स्थित एक ऐतिहासिक धर्मशाला इस समय मौत का साया बनी खड़ी है। यह इमारत इतनी जर्जर हो चुकी है कि कभी भी भरभराकर गिर सकती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। क्या प्रशासन को किसी निर्दोष की जान जाने के बाद ही जागने की आदत हो गई है?
व्यस्ततम चौराहे पर खतरे की तरह खड़ी इमारत
तहसील चौराहा सीहोर का वह इलाका है जहां सुबह से लेकर रात तक हजारों लोगों की आवाजाही होती है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के लोग अपने कलेक्ट्रेट, तहसील और कोर्ट से जुड़े कामों के लिए इसी रास्ते से गुजरते हैं। इसी मुख्य मार्ग के नजदीक स्थित यह जर्जर धर्मशाला अब एक खतरा बन चुकी है। इमारत की दीवारें दरक चुकी हैं, छत का हिस्सा कभी भी नीचे गिर सकता है।
आगामी बारिश के मौसम में जब तेज हवाएं और पानी इस खोखली हो चुकी इमारत पर पड़ेगा, तो इसके ढहने की आशंका 100% है। इस गंभीर मुद्दे पर सीहोर के समाजसेवी विवेक राठिया ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने जनता की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। कहा है कि यह सिर्फ एक जर्जर इमारत नहीं है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का जीता-जागता सबूत है। रोज़ यहाँ से हज़ारों लोग गुज़रते हैं, मासूम बच्चे निकलते हैं। अगर बारिश के दौरान यह धर्मशाला गिरती है, तो कई परिवारों के चिराग बुझ सकते हैं। प्रशासन को तुरंत इस पर एक्शन लेना चाहिए, कागजी खानापूर्ति बंद हो।
राठिया ने सीधे तौर पर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि अगर समय रहते इस ढांचे को नहीं ढहाया गया या सुरक्षित नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में होने वाले किसी भी हादसे की पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और नगर पालिका की होगी।
जब इस खौफनाक जमीनी हकीकत को लेकर नगर पालिका के अधिकारियों से बात की गई, तो उनका जवाब हमेशा की तरह बेहद ढुलमुल और गैर-जिम्मेदाराना रहा। नगर पालिका का कहना है कि मामला संज्ञान में है और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि यह नियम-नियम का खेल कब तक चलेगा? क्या नगर पालिका के नियम तब लागू होंगे जब मलबे के नीचे लोग दब जाएंगे? नोटिस देने और फाइलों को एक टेबल से दूसरी टेबल पर घुमाने के चक्कर में मानसून आ जाएगा और तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।
मानसून आने में कुछ ही दिन बचे हैं, लेकिन अभी तक इमारत को खतरनाक घोषित कर बैरिकेडिंग भी नहीं की गई है। व्यस्त कमर्शियल एरिया होने के बावजूद नपा की टीम ने मौके का मुआयना कर तुरंत एक्शन लेने की जहमत नहीं उठाई।
सीहोर की जनता अब नगर पालिका के इन खोखले और रटे-रटाए बयानों से थक चुकी है। मामला लोगों की जिंदगी और मौत से जुड़ा है। कलेक्टर और नगर पालिका सीएमओ को चाहिए कि वे एसी कमरों से बाहर निकलकर इस जमीनी खतरे को देखें। विवेक राठिया की इस चेतावनी को हल्के में लेना प्रशासन को बहुत भारी पड़ सकता है। सीहोर की जनता पूछ रही है क्या प्रशासन को किसी बड़ी दुर्घटना का इंतज़ार है, या वक्त रहते इस ‘मौत की धर्मशाला’ पर बुलडोजर चलेगा?

