हेमंत शर्मा, इंदौर। बाबा रामदेव और पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद अब खत्म हो गया है। पतंजलि फूड्स लिमिटेड ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ इंदौर हाईकोर्ट में दायर 50 करोड़ रुपये की मानहानि याचिका वापस ले ली है। दोनों पक्षों के बीच समझौते की जानकारी अदालत के सामने रखे जाने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी और मामला समाप्त हो गया।यह विवाद करीब चार साल पहले शुरू हुआ था और बाद में मामला जिला अदालत से होते हुए हाईकोर्ट तक पहुंच गया था।

2022 के बयान से शुरू हुआ था विवाद

पूरे मामले की शुरुआत साल 2022 में बृजभूषण शरण सिंह के एक सार्वजनिक बयान से हुई थी। उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान पतंजलि के घी की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए उसे कथित तौर पर नकली बताया था। बयान सामने आने के बाद पतंजलि फूड्स ने इसे कंपनी की प्रतिष्ठा और कारोबार को नुकसान पहुंचाने वाला बताया। कंपनी की ओर से यह दावा भी किया गया कि इस बयान का उसके व्यावसायिक हितों और ब्रांड इमेज पर असर पड़ा।इसके बाद कंपनी ने कानूनी रास्ता अपनाते हुए 50 करोड़ रुपये की मानहानि का दावा दायर किया था।

जिला अदालत से हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला

शुरुआत में विवाद से जुड़ी कानूनी कार्रवाई जिला अदालत में चली। बाद में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और अन्य कानूनी पहलुओं से जुड़ा मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा।इंदौर में पतंजलि फूड्स का कार्यालय होने के आधार पर कंपनी की ओर से यहां कानूनी कार्रवाई की गई थी।

दोनों पक्षों के बीच बातचीत से बदला पूरा घटनाक्रम

लंबी कानूनी प्रक्रिया के बीच दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई। इसके बाद सितंबर के अंत में विवाद को आपसी सहमति से खत्म करने पर सहमति बनी।बाबा रामदेव के करीबी सहयोगी आचार्य बालकृष्ण की ओर से भी बाद में यह बात सामने आई थी कि बातचीत के जरिए गलतफहमियां दूर हो गई हैं और विवाद को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है।इसके बाद पतंजलि फूड्स ने अदालत में औपचारिक रूप से याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी।

हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद मामला खत्म

मंगलवार को जस्टिस संदीप एन. भट्ट की पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। कंपनी की ओर से अदालत को बताया गया कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो चुका है और इसी आधार पर मानहानि याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी गई।अदालत ने पक्षों की जानकारी दर्ज करने के बाद याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी। इसके साथ ही लंबे समय से चल रहा यह कानूनी विवाद समाप्त हो गया।

50 करोड़ की मांग से समझौते तक पहुंची कहानी

चार साल पहले एक सार्वजनिक बयान से शुरू हुआ विवाद पहले कानूनी नोटिस और मानहानि के दावे तक पहुंचा। कंपनी ने बयान को अपनी प्रतिष्ठा और कारोबार के लिए नुकसानदायक बताया और 50 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की।लेकिन अब दोनों पक्षों के बीच समझौते के बाद 50 करोड़ रुपये की मानहानि याचिका वापस ले ली गई है।

यानी जिस विवाद ने अदालत की चौखट तक पहुंचकर लंबी कानूनी लड़ाई का रूप लिया था, उसका अंत अब आपसी सहमति से हुआ है। 2022 में बयान से विवाद शुरू हुआ… 50 करोड़ की मानहानि याचिका दायर हुई… मामला हाईकोर्ट पहुंचा और अब समझौते के बाद उसी मुकदमे को वापस लेकर विवाद पर पूर्ण विराम लगा दिया गया।

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