Dharm Desk – कई लोगों को बात-चीत करते समय, पढ़ाई के दौरान या चिंता में अपने नाखून दांतों से कुतरने की आदत होती है। देखने में यह एक सामान्य आदत लग सकती है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिष में इसे अनुचित व्यवहार तथा नकारात्मक आदत के रूप में देखा जाता है। नाखूनों को दांतों से कुतरना दरिद्रता और आर्थिक परेशानियों का संकेत होती है। ज्योतिषीय में ग्रहों की प्रतिकूलता से भी जोड़ा जाता है। ज्योतिषियों के अनुसार, लगातार नाखून चबाने की अदात से कुंडली में शनि दोष और सूर्य दोष उत्पन्न हो सकता है, जिससे जीवन में कई प्रकार की बाधाएं आती हैं।

ज्योतिषीय विशेषज्ञ बताते हैं कि बार-बार नाखून टूटना या नाखूनों को कुतरना इस बात का संकेत है कि आप बुरे दिनों से गुजरने वाले है। ये आदत मन की चंचलता, बेचैनी और व्यवहार संबंधी आदतों के कारण भी होता है। इससे ग्रहों के प्रतीकात्मक प्रभाव भी प्रभावित होते हैं। नाखून कुतरने की आदत को किसी एक ग्रह, विशेषकर बुध या मंगल, से जोड़ने का कोई सर्वमान्य और प्रमाणित नियम स्थापित नहीं है। इसलिए इस आदत को ग्रहों की नाराजगी या किसी अनिष्ट का निश्चित संकेत मानने के बजाय अपनी दिनचर्या और मानसिक स्थिति पर ध्यान देना अधिक उपयोगी है।

विज्ञान के अनुसार क्यों कुतरते हैं नाखून?
चिकित्सा विज्ञान में नाखून कुतरने की आदत को ऑनिकोफैजिया कहा जाता है। इसके पीछे कई सामान्य कारण हो भी सकते हैं।

  1. तनाव और चिंता: मानसिक दबाव के दौरान कुछ लोग अनजाने में नाखून कुतरने लगते है
  2. बोरियत: खाली बैठने या किसी काम में व्यस्त रहने के दौरान यह आदत विकसित हो सकती है।
  3. अनजाने में दोहराव: कई लोगों को पता भी नहीं चलता कि वे कब नाखून कुतरना शुरू कर देते हैं
  4. आदत और भावनात्मक राहत: कुछ लोगों को ऐसा करने से थोड़ी देर के लिए तनाव कम महसूस होता है।

इस आदत से छुटकारा पाने के लिए क्या करें?
नाखून कुतरने की आदत छोड़ने के लिए सबसे पहले यह पहचानें कि ऐसा कब और किन परिस्थितियों में हो रहा है। नाखून छोटे और साफ रखें, तनाव के समय गहरी सांस लेने का अभ्यास करें तथा हाथों को किसी दूसरी गतिविधि में व्यस्त रखें। जरूरत पड़ने पर नाखून चबाने से रोकने वाली कड़वे स्वाद की विशेष नेल पॉलिश भी मददगार हो सकती है।