मऊ की करीब 70 साल पुरानी चौधरी चरण सिंह दोहरीघाट पंप नहर का आधुनिकीकरण पूरा होने के बाद शुक्रवार को जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने इसका लोकार्पण किया. नई मशीनरी और अपग्रेडेड सबस्टेशन के बाद नहर को 660 क्यूसेक क्षमता से चलाया जा सकेगा, जिससे मऊ और बलिया के करीब 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई सुविधा मिलेगी.

मऊ. करीब 70 साल पुरानी चौधरी चरण सिंह दोहरीघाट पंप नहर का आधुनिकीकरण पूरा हो गया है. शुक्रवार को प्रदेश के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने आधुनिकीकृत सिंचाई परियोजना का लोकार्पण किया. वर्ष 1956 में द्वितीय पंचवर्षीय योजना के दौरान बनी इस पंप नहर में पुरानी मशीनरी की जगह नई मोटर-पंप और पैनल लगाए गए हैं, जबकि सबस्टेशन को भी अपग्रेड किया गया है.

आधुनिकीकरण के बाद पंप नहर को उसकी निर्धारित 660 क्यूसेक क्षमता से संचालित किया जा सकेगा. विभाग के अनुसार इससे मऊ और बलिया के करीब 55 हजार हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई की सुविधा मिलेगी.

परिसर को मिला नया रूप

परियोजना में केवल मशीनरी को ही नहीं बदला गया है, बल्कि पूरे परिसर का भी कायाकल्प किया गया है. यहां आधुनिक कंट्रोल रूम और नए उपकरण लगाए गए हैं.

परिसर में 30 किलोवाट क्षमता के सोलर पैनल और टेरेस सिटिंग एरिया भी तैयार किया गया है. पेड़-पौधों के जरिए परिसर को नया स्वरूप दिया गया है.

किसानों को मिलेगा लाभ

दोहरीघाट पंप नहर से मऊ और बलिया के किसानों को खरीफ और रबी दोनों मौसमों में सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है. विभाग का उद्देश्य सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करना और किसानों तक समय पर पानी पहुंचाना है.

लोकार्पण कार्यक्रम में किसानों को सम्मानित किया गया. इस दौरान परिसर में वृक्षारोपण और बच्चों को बैग वितरण का कार्यक्रम भी हुआ. स्थानीय लोगों और किसानों के साथ जनसंवाद भी आयोजित किया गया.

660 क्यूसेक होगी आपूर्ति

असिस्टेंट इंजीनियर चंद्रप्रकाश के मुताबिक पंप कैनाल की मूल क्षमता में कोई कमी नहीं आई थी, लेकिन करीब 20 साल पुरानी मशीनरी के कारण इसकी कार्यक्षमता प्रभावित हो गई थी. पुरानी मशीनों के चलते नहर अपनी निर्धारित क्षमता का लगभग 60 प्रतिशत ही पानी उपलब्ध करा पा रही थी.

इस वजह से किसानों को करीब 400 से 450 क्यूसेक पानी ही मिल पा रहा था. अब मशीनरी के दोबारा चालू होने के बाद पंप कैनाल को पूरी क्षमता से संचालित किया जा सकेगा और किसानों को निर्धारित क्षमता के अनुसार करीब 660 क्यूसेक पानी उपलब्ध हो सकेगा.