Business Desk – Dollar-Rupee Today : सोमवार (4 मई) को, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.95 पर खुला, जो गुरुवार (30 अप्रैल) को अपने पिछले बंद स्तर 94.91 से 4 पैसे की गिरावट थी. मुद्रा बाजार ने कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी फंडों के लगातार बहिर्प्रवाह पर प्रतिक्रिया दी. पिछले सत्र में, स्थानीय मुद्रा 95.33 के अब तक के सबसे निचले स्तर को छूने के बाद 94.91 पर बंद हुई थी. शुक्रवार (1 मई) को घरेलू वित्तीय बाज़ार बंद रहे.

एशियाई व्यापार के शुरुआती घंटों के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में थोड़ी गिरावट देखी गई, जब अमेरिका ने घोषणा की कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों को निकालने के प्रयास शुरू करेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य तटस्थ देशों के लिए कठिनाइयों को कम करना था. हालांकि उन्होंने इस मामले के बारे में सीमित विवरण ही दिए.
ब्रेंट क्रूड जुलाई वायदा $105.50 प्रति बैरल के निचले स्तर तक गिर गया, जिसके बाद यह $108 के करीब कारोबार करने लगा. व्यापारी अमेरिका-ईरान वार्ता में हो रहे घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं. तेल की कीमतों में अस्थायी राहत के बावजूद, विश्लेषकों का अनुमान है कि भू-राजनीतिक वार्ताओं में प्रगति की कमी कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को सीमित कर देगी, जिससे ऊर्जा बाज़ार में अस्थिरता बनी रहेगी.
हाल के सत्रों में रुपया दबाव में रहा है, पिछले आठ कारोबारी दिनों में इसमें लगभग 2% की गिरावट आई है. यह कमजोरी तेल की ऊंची कीमतों के प्रभाव को दर्शाती है, जिसने आयातकों के बीच हेजिंग गतिविधि को तेज कर दिया है. तेल रिफाइनरों की ओर से डॉलर की लगातार मांग बनाए रखी है. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) से आने वाले निवेश ने भी मुद्रा पर दबाव डाला है. अप्रैल में, भारतीय इक्विटी बाजार में लगभग $6.5 बिलियन का बहिर्प्रवाह देखा गया, जिससे 2026 के लिए कुल निकासी लगभग $20.6 बिलियन तक पहुँच गई.
यह आंकड़ा पिछले वर्ष के स्तरों को पहले ही पार कर चुका है. बाजार प्रतिभागियों ने बताया कि कमजोर धारणा, लगातार पूंजी बहिर्प्रवाह और भारतीय रिजर्व बैंक की फॉरवर्ड बुक स्थिति से उत्पन्न दबाव के कारण रुपए के लिए अल्पकालिक दृष्टिकोण चुनौतीपूर्ण बना हुआ है.
रुपये का आउटलुक
CR Forex Advisors की रिसर्च टीम के MD,अमित पबारी के अनुसार, रुपया इस समय एक अहम मोड़ पर है. न केवल तकनीकी रूप से, बल्कि मनोवैज्ञानिक रूप से भी. उन्होंने संकेत दिया कि 95.20–95.30 की रेंज एक मजबूत शॉर्ट-टर्म रेजिस्टेंस जोन का काम कर सकती है. मौजूदा बाजार स्थितियों को देखते हुए पबारी को इस बात की काफी संभावना दिख रही है कि रुपया 94.20 93.80 के स्तर तक वापस आ सकता है.
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