Dharm Desk – भारतीय परंपरा में पूजा-पाठ और दीपक जलाने का विशेष धार्मिक महत्व होता है। घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए प्रतिदिन सुबह-शाम घर में दीपक जलाया जाता है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि पूजा के बाद दीपक में बची हुई या जली हुई बाती का क्या किया जाए। अधिकतर लोग अनजाने में पूजा के बाद बची हुई बातियों को कचरे में फेंक देते हैं। जिसे धार्मिक दृष्टिकोण से अशुभ माना जाता है। इसे फेंकने के बजाय किस तरह संभालकर रखना चाहिए और इसका सही उपयोग क्या है यह जानना जरूरी है।

बातियों का इकट्ठी करें
रोजाना पूजा के बाद बचने वाली आधी जली या जली हुई बातियों को कचरे में फेंकने के बजाय इन्हें लगभग 10 दिनों तक किसी सुरक्षित जगह पर इकट्ठा करते रहें। 11वें दिन एक बड़े बर्तन में एकत्र की गई सभी बातियों को रखें। इसमें कपूर और 4 लौंग डालकर बातियों को पूरी तरह जला लें। जब बाती जल रही हो तो उस बर्तन से निकलने वाले धुएं को पूरे घर में घुमाएं और अंत में बर्तन को छत पर रख दें। ऐसा करने से कपूर और लौंग के धुएं से घर की नकारात्मकता समाप्त होती है। अगले दिन ठंडी हो चुकी राख भस्म को साफ-सुथरी डिब्बी में संभालकर रख लें।
पूजा की राख का उपयोग
- जब भी घर का कोई सदस्य किसी जरूरी काम, नौकरी के साक्षात्कार या परीक्षा के लिए बाहर जाए, तो इस राख का शुभ तिलक लगाकर भेजें।
- बच्चों की नजर उतारने के लिए इस राख को सिर से सात बार उतरकर पौधों की जड़ों में डाल देना चाहिए।
- यदि राख अधिक मात्रा में बच जाए तो उसे इधर-उधर फेंकने के जगह गमलों या पेड़-पौधों की मिट्टी में मिला दें। इससे पौधों को पोषण मिलता है और धार्मिक वस्तु का सही उपयोग भी हो जाता है।



